सुखपाल खैरा का नेता प्रतिपक्ष पद से हटना तय माना जा रहा था। बस यह स्पष्ट नहीं था कि कब उन्हें हटाया जाता है। क्योंकि खैरा ने आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को सीधी चुनौती दे दी थी।
आप हाईकमान का इतिहास है कि उसे यस मैन ही पसंद आते हैं। इसीलिए प्रमुख विपक्षी पार्टी बनने के बाद तेजतर्रार खैरा की जगह एचएस फूलका को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया। पर फूलका के इस्तीफे के बाद आप के पास खैरा को बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। लेकिन दिल्ली में बैठे लोगों को यह एहसास था कि मौका मिलने पर खैरा उन्हें भी आंखें दिखाने से नहीं चूकेंगे। यही हुआ, केजरीवाल के बिक्रम मजीठिया से माफी मांगने के बाद खैरा खुल कर विरोध में आ गए।
उन्होंने न सिर्फ मीडिया में जाकर इसका डट कर विरोध किया। बल्कि, अपने समर्थन में विधायकों का एक गुट बना कर हाईकमान को चुनौती देने की कोशिश की। इतना ही नहीं, खैरा और उनके साथी विधायकों ने यह भी एलान कर दिया कि वह इस बारे में किसी से बात करने के लिए दिल्ली नहीं जाएंगे। जिसे बात करनी हो, यहां आकर करे। खैरा को हटाने की स्क्रिप्ट उसी दिन दिल्ली में लिख दी गई थी, बस उस पर तारीख डालनी बाकी थी। उसके बाद से खैरा अपना गुट बना कर लगातार संगठन से अलग चलते रहे।
दिल्ली महिला आयोग की चेयरपर्सन स्वाती मालीवाल की भूख हड़ताल में शामिल होने गए। फिर दिल्ली जाकर भी केजरीवाल, मनीष सिसोदिया से नहीं मिले। पिछले दिनों खैरा और अन्य विधायक दिल्ली में सिसोदिया से मिलने गए थे तो केजरीवाल ने खैरा से मिलने से इंकार कर दिया था।
हालांकि खैरा ने इसका खंडन किया था। पार्टी ने डॉ. बलबीर को पंजाब का सह-प्रधान बनाया, पर उनके साथ भी खैरा का छत्तीस का आंकड़ा रहा। जोकि हाईकमान को लगातार अखर रहा था। खैरा पर पार्टी प्लेटफार्म पर बोलने के बजाय मीडिया में जाने के आरोप लग रहे थे। हाल ही में पार्टी के कई नेताओं ने इस्तीफे दे दिए थे, उनके लिए भी संगठन में कुछ लोग खैरा को जिम्मेदार ठहरा रहे थे।
खैरा ने पहले ही जताई थी आशंका
सुखपाल खैरा को भी एहसास हो गया था कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष पद से हटाया जा सकता है, उन्होंने पहले ही इसकी आशंका जताई थी। हाल ही में खैरा ने फेसबुक वीडियो के जरिए कहा था कि डॉ. बलबीर ने कहा है कि वह वर्करों से पैसे लेते हैं। उन्हें नेता प्रतिपक्ष पद से हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने केजरीवाल और सिसोदिया से बात करके जांच की मांग की है।