पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा के पंजाब में नई पार्टी बनाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। भुलत्थ के गांव रामगढ़ में सुखपाल खैरा की भाभी सरपंची का चुनाव हार गई हैं। हालांकि रामगढ़ में अपने वोट का इस्तेमाल करने के बाद अपनी भाभी के लिए खुद खैरा बूथ पर तैनात रहे। फिर भी उनकी भाभी किरणबीर कौर 54 वोटों से निर्मल सिंह से हार गई।
गांव रामगढ़ में सुखपाल खैरा के चचेरे भाई की पत्नी किरणबीर कौर को कुल 400 वोट मिले। जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी निर्मल सिंह को 454 वोट मिले। इससे निर्मल सिंह ने खैरा की भाभी को 54 वोटों से शिकस्त देकर सरपंची का चुनाव जीत लिया। गांव में मतदान करने के बाद जब खैरा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जैसे उनके गांव में चुनाव में अकाली और कांग्रेस एक पक्ष बन कर उनके समर्थन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, उससे उनके सूबे में फ्रेंडली मैच का पर्दाफाश होता है।
यह हार भी उसी वजह से हुई है। निष्पक्ष तरीके से चुनाव प्रक्रिया नहीं होने दिया गया। उन्होंने कहा कि अकाली राज की तरह इन चुनावों में भी कांग्रेस ने 28000 नामांकन रद्द कर चुनाव में सरकारी धक्केशाही को प्रमाणित किया है। खैरा ने बताया की सूबे में सरकारी दबाव में बनी इन पंचायतों का कोई आधार नहीं रहेगा।
उन्होंने फिरोजपुर और गुरदासपुर और अन्य स्थानों पर आगजनी और हिंसक घटनाओं की निंदा की। खैरा ने नए साल में प्रधानमंत्री मोदी की पंजाब फेरी पर तंज कसते हुए कहा कि किसानों के मामले में पंजाब की कांग्रेस सरकार को नसीहत देने वाले प्रधानमंत्री बताएं कि उन्होंने किसानों और देश के नौजवानो के रोजगार के लिए क्या किया है। सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि नए साल में उनकी नई पार्टी लोकसभा चुनाव में सूबे की जनता के सामने एक नया विकल्प होगी।