दरअसल, दक्षिण भारत के अधिकतर राज्यों के बड़े भूखंड समुद्री तटीय इलाकों से सटे हुए हैं। ये राज्य अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से सटे हुए हैं। भारतीय समुद्रीय क्षेत्र में हमारे कई द्वीप भूखंड भी हैं। जिनकी सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी भी नेवी के साथ-साथ एयरफोर्स के अधीनस्थ दक्षिणी कमांड के कंधों पर रहती है। ऐसे तटीय इलाकों में आतंकी व समुद्री लुटेरों के हमले संबंधी खतरों से हमारी सेनाएं हमेशा अलर्ट भी रहती हैं। लेकिन तंजावुर एयरफोर्स स्टेशन पर सुखोई की स्क्वाड्रन तैनात होने के बाद बंगाल की खाड़ी के साथ लगते साउदर्न-ईस्टर्न बॉर्डर की सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता हो जाएगी।
इंडेक्शन सेरेमनी में पहुंच सकते हैं सीडीएस रावत
सुखोई की पहली स्क्वाड्रन सेरेमनी के अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत भी 20 जनवरी को तंजावुर एयरफोर्स स्टेशन पहुंच सकते हैं। जबकि उनके अलावा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया और साउदर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ अमित तिवारी भी मुख्य रूप से इस सेरेमनी में मौजूद रहेंगे। एयरफोर्स के एक आला अफसर के अनुसार तंजावुर में सुखोई लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन दक्षिणी मोर्चों पर सुरक्षा के मद्देनजर एक मील का पत्थर साबित होगी।