सुखना लेक घूमने गए पर्यटकों से मारपीट
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लोगों के पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट सूखना लेक के सूखने का बड़ा कारण सामने आया है। इसकी वजह से लेक की गहराई भी कम कर दी है। सूखती सुखना को बचाने में चंडीगढ़ प्रशासन फेल साबित हो रहा है। पानी का इंतजाम तो दूर गाद निकालने में भी टालू रवैया अपनाए हुए है।
गाद ने सुखना की भंडारण क्षमता कम कर दी है। हालत यह है कि लेक में आधी गाद है और आधा पानी। वर्तमान में पानी का स्तर 1153.25 फुट है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पानी का स्तर इतना भी नहीं है। इसमें आधा हिस्सा गाद का है। साल 2012 के बाद से अब तक गाद नहीं निकाली गई है।
प्रशासन के पास सिर्फ दो माह हैं। इसके बाद मानसून आ जाएगा। इसके बाद गाद निकालना मुश्किल हो जाएगा। प्रशासन अब भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
रुड़की भी सूखने की मुख्य वजह गाद को बता चुका है
सुखना लेक बचाने के लिए पाइप लाइन डालने का काम
नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलॉजी (एनआईएच) रुड़की भी अपनी स्टडी में सुखना के सूखने की मुख्य वजह गाद को बता चुका है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन शहर की लाइफलाइन सुखना को बचाने के लिए अब तक ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाईड्रोलॉजी की स्टडी को आधार बनाते हुए पर्यावरण विभाग ने यूटी के इंजीनियरिंग विभाग से गाद की समस्याओं के हल के लिए आधुनिक मशीन खरीदनें के लिए कहा था।
लेकिन इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही के चलते अब तक सुखना लेक में से सिल्ट (गाद) निकालने के लिए मशीन नहीं खरीदी गई। इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की ओर से इस आधुनिक मशीन पर करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। लेकिन बजट पास न होने के चलते मशीन की खरीदारी भी अधर में पड़ गई। आईएफएस संतोष कुमार ने बताया कि सुखना के लिए पानी का मुख्य स्त्रोत बारिश है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में बारिश न होने के चलते सुखना का सूखना स्वाभाविक है।
पहले 5 सालों में ही 23 प्रतिशत तक सूखी गई थी सुखना
सुखना लेक पर पहुंचे विदेशी परिंदे
सुखना का निर्माण वर्ष 1958 में हुआ था। पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सुखना के निर्माण से लेकर अगले पांच साल के बीच सुखना का वाटर लेवल 23 प्रतिशत घटा गया था। उसी समय शहर के शिल्पकार ली कार्बूजिए ने प्रशासन व मौजूदा सरकार को गाद की समस्या को लेकर सचेत किया था। जिसके बाद ग्रेटर पंजाब गवर्नमेंट ने वर्ष 1963 में सुरखा के संरक्षण के लिए करीब 26 स्क्वायर किलोमीटर जमीन अधिग्रहीत की थी।
संरक्षण के लिए कमेटी तो बनी लेकिन बैठक नहीं हुई
सुखना के संरक्षण को लेकर वर्ष 2011 में प्रशासन की ओर से एक कमेटी गठित की गई थी। कमेटी का नेतृत्व चीफ कंजर्वेटर आफिसर के हाथों में था। लेकिन कमेटी की बैठक न होने के चलते सुखना के संरक्षण को लेकर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
सुखना को बचाने के लिए सुझाव
पीयू के प्रोफेसर अमरीक सिंह ने कहा कि गाद पानी की गहराई कम कर देती है। वहीं, पानी में वीड पैदा होने के कारण वाटर लेवल कम होता जाता है। इसके लिए समय समय पर पानी में से वीड व गाद निकालते रहना चाहिए।
हाईकोर्ट के निर्देश पर सुखना के संरक्षण के लिए प्रशासन की ओर से जल्द ही तकनीकी विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा सुखना में से सिल्ट व वीड निकालने का काम जारी है।
- अनुराग अग्रवाल, गृह सचिव