सुखना कैचमेंट एरिया में आने वाले घरों को तोड़ने के आदेश पर यूटी प्रशासन मंगलवार से जमीनी स्तर पर सर्वे शुरू करने जा रहा है। एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर भी अधिकारियों के साथ सुखना कैचमेंट एरिया का हवाई दौरा करेंगे।
एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि इस सर्वे के माध्यम से पता चलेगा कि अगर आदेश के अनुसार कैचमेंट में आने वाले घरों को तोड़ना पड़े तो कितने घर प्रभावित होंगे। एक अनुमान के मुताबिक चंडीगढ़ क्षेत्र में 60-70 मकान ही सुखना कैचमेंट के दायरे में आते हैं।
पुख्ता आंकड़ों के लिए ही यह सर्वे कराया जा रहा है। परिदा ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार मोहाली और पंचकूला के डीसी और चंडीगढ़ के मुख्य वन संरक्षक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। चंडीगढ़ प्रशासन हाईकोर्ट के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं देगा।
अवैध निर्माण को देखने के लिए प्रशासक करेंगे हवाई दौरा
सुखना कैचमेंट में हुए अवैध निर्माण को देखने के लिए प्रशासक वीपी सिंह बदनौर एडवाइजर मनोज परिदा और अन्य अधिकारियों के साथ हवाई दौरा करेंगेे। इस मामले पर एडवाइजर मनोज परिदा का कहना है कि चंडीगढ़ के इलाके में ज्यादा निर्माण नहीं पड़ते, लेकिन फिर भी हाईकोर्ट की ओर से जो आदेश दिए गए हैं, उनके अनुसार कार्रवाई होगी। हाईकोर्ट के आदेशों में कार्रवाई करने के लिए समय सीमा तय नहीं की गई है इसलिए अभी वह सर्वे करेंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कैचमेंट एरिया में चंडीगढ़ के दो गांव
यूटी प्रशासन के दो गांव जिसमें कांसल और खुड्डा अलीशेर शामिल हैं में सुखना कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माण हो रखे हैं। लाल डोरे से बाहर के निर्माणों पर पेरीफेरी एक्ट भी लागू होता है। बहुत से निर्माण ऐसे भी बताए जा रहे हैं जो लाल डोरे के भीतर हैं, लेकिन कैचमेंट एरिया में पड़ते हैं। कांसल व खुड्डा अलीशेर समेत पंजाब व हरियाणा के कैचमेंट एरिया में रह रहे लोग कह चुके हैं कि वे किसी भी सूरत में इन निर्माणों को गिरने नहीं देंगे चाहे इसके लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।