प्रो. राकेश कपूर
चंडीगढ़ पीजीआई के रेडियोथैरेपी रीजनल सेंटर के यूनिट हेड प्रो. राकेश कपूर को होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर मुल्लांपुर और होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल बठिंडा का डायरेक्टर बनाया गया है। ये दोनों इंस्टीट्यूट टाटा मेमोरियल सेंटर मुंबई के अंतर्गत आते हैं। स्वभाव से सहज डॉ. कपूर जाने-माने रिसर्चर हैं। उनके 155 साइंटिफिक पेपर पब्लिश हो चुके हैं।
डॉ. राकेश कपूर नेशनल और इंटरनेशनल बॉडी जैसे आईसीएमएआर, डीएसटी आईएईए के रिसर्च प्रोजेक्ट प्रिंसिपल और को-इंवेस्टिगेटर रहे हैं। पीजीआई में ज्वाइंट एमएस, एडिशनल एमएस के पद पर भी कार्यरत रहे हैं। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई गवर्नमेंट कॉलेज जम्मू से की। उसके बाद 1994 में पीजीआई में बतौर रेजिडेंट ज्वाइन किया। 2000 में कंसल्टेंट बनें। डॉ. कपूर के पिता देश के विभाजन से पहले लाहौर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर थे। विभाजन के बाद इनका परिवार जम्मू में बस गया था।
प्रो. राकेश कपूर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि बेशक वह अब पीजीआई में नहीं रहेंगे, लेकिन अपने मरीजों से दूर भी नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में ही रहेंगे और जिन मरीजों का उनकी देखरेख में इलाज चल रहा है, उन्हें उनकी सलाह की जरूरत होगी तो वह उसके लिए तैयार रहेंगे। उन्होंने बताया कि होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर मुल्लांपुर को जल्द शुरू करवाने के लिए प्रयास करेंगे। उनकी कोशिश रहेगी कि यह इंस्टीट्यूट जून तक शुरू हो जाए।
डॉ. कपूर ने यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कोनसिन यूएसएस से टोमोथैरेपी की ट्रेनिंग हासिल की। स्टॉक होम स्वीडन से गामा नाइफ की ट्रेनिंग ली। कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए रोबोटिक ब्रैकीथैरेपी पीजीआई में प्रो. राकेश कपूर ने ही शुरू की। इस तकनीक के जरिए रेडिएशन और इमेज गाइडेंस को साथ-साथ करके सिर्फ कैंसर प्रभावित क्षेत्र में ही रेडिएशन देकर बॉडी के अन्य अंगों पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। पीजीआई में इसकी फैलोशिप शुरू कराने का श्रेय डॉ. कपूर को ही जाता है।