फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंडीगढ़ः हाईकोर्ट के आदेशों के बाद मचा हड़कंप, सपनों का आशियाना बचाने सड़कों पर उतरे लोग

Sun, 08 Mar 2020 01:54 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
विज्ञापन
सड़कों पर उतरे लोग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सुखना कैचमेंट एरिया को लेकर हाईकोर्ट की ओर से सुनाए गए फैसले के बाद अपने आशियानों को बचाने के लिए चार गांव जिनमें कांसल, कैंबवाला, खुड्डा अली शेर, सकेतड़ी से हजारों की संख्या में लोग ट्रिब्यून कॉलोनी शिव मंदिर के पास जमा हुए। सुखना कैचमेंट एरिया मामले पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपने आशियाने को टूटने से बचाने के लिए योजना पर विचार विमर्श किया गया। लोगों का कहना था कि उन्हें मुआवजा नहीं चाहिए, वह अपने घर नहीं टूटने देंगे।
विज्ञापन


सुखना कैचमेंट मामले पर हुई सभा में विधायक कंवर संधू ने कहा कि मेहनत और खून-पसीना बहाकर गरीब लोगों ने अपने घर बनाए हैं।  ऐसा लग रहा है, जैसे ये गांव कांसल, कैंबवाला, खुड्डा अली शेर और सकेतड़ी के लोग सुखना कैचमेंट के दुश्मन हैं। जबकि यह सुखना लेक गांव कांसल और सकेतड़ी की जमीन पर बनी हुई है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सुखना कोई प्राकृतिक लेक नहीं है। चंडीगढ़ को बाढ़ से बचाने के लिए यह लेक बनाई गई थी।

लेकिन इस लेक को बचाने के साथ पानी की कमी को पूरा करने के लिए 24 गांव की 8 हजार एकड़ जमीन पंजाब सरकार की ओर से 1961-63 में एक्वायर की गई थी। जबकि आज अगर इस लेक का जो अस्तित्व बचा है वो इन 24 गांव की बदौलत ही है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि हाईकोर्ट के जज साहिबान ने जो लेक को बचाने की बात कही है, इससे उन्होंने शायद यह साबित किया है कि इन गांव के गरीब लोग अब लेक के दुश्मन हो गए हैं।
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि कोर्ट कचहरी के बीच यह केस पिछले 9 साल से चल रहा था, किसी को मौका नहीं दिया कि वह इस मामले पर कुछ कर सकें। इस केस में कम से कम 15 वकील शामिल थे। हर बार उन्हें स्ट्रे डॉग के मसले पर बात कर अगली सुनवाई के लिए टाल देते थे। जिस दिन यह बड़ा फैसला सुनाया गया, उस दिन इसकी पैरवी करने वाले तीन बड़े वकील कचहरी में मौजूद ही नहीं थे।
विज्ञापन

री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट बना उसकी धज्जियां उड़ा दी

इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए विधायक कंवर संधू ने कहा कि जब से 1966 में पंजाब की री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट बना उसकी धज्जियां उड़ा दी। चंडीगढ़ जो है वो पंजाब और हरियाणा की राजधानी है। क्या चंडीगढ़ दोनों से ज्यादा ऊपर हो गया है। उन्होंने कहा कि सही मायनों में देखा जाए तो कुदरत के साथ खिलवाड़ चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन कर रहा है। जबकि उन्होंने कैंबवाला के पास खुद ही पूरा जंगल तबाह कर दिया है। जिस वजह से वहां अब कोई भी जानवर दिखाई नहीं देता। जिसका जिम्मेदार आज गरीब लोगों को ठहराया जा रहा है।

असल में चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन खुद इसमें शामिल है। विधायक ने कहा कि किसी के आशियाने टूटने नहीं दिए जाएंगे। इसके लिए सियासती पार्टी और लोगों की सहमति से आने वाले दिनों में जल्द ही कमेटी बनाकर केस कानूनी तौर पर लड़ेंगे। कंवर संधू ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो सभी को मिलजुलकर संघर्ष भी करना पड़ेगा। इसके बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री जगमोहन सिंह कंग ने कहा कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के बाद से कैप्टन सरकार भी काफी चिंतित है। लोगों के दर्द को अपना समझते हुए, कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने तुरंत बैठक की।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सियासती पार्टी अपने-अपने हितों से ऊपर उठकर सांझे मसले पर जमा हुई है। यह एक उचित कदम है। जगमोहन सिंह ने लोगों से वायदा किया कि किसी भी हालत में मकान टूटने नहीं दिए जाएंगे। वहीं अकाली दल पूर्व एमपी प्रेम सिंह चंदूमाजरा के बेटे सिमरनजीत सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि हाईकोर्ट का जो फैसला सामने आया है। उसे बदलने के लिए मिलजुल कर सियासती दबाव डालने की जरूरत है।

इस अवसर पर मौजूद अन्य महिलाओं ने बातचीत के दौरान कहा कि यहां पर हम जैसे कई लोगों ने बड़ी मेहनत से पाई-पाई जोड़कर अपनी जिंदगी भर की कमाई से अपने घर बनाए हैं। अगर अपने इन आशियानों को बचाने के लिए उन्हें जान भी देनी पड़ी तो वे इसकी परवाह नहीं करेंगे। उन्हें सरकार और सियासती पार्टी पर पूरा यकीन है कि वे उनकी खुशियों को रौंदने नहीं दिया जाएगा।

सुखना कैचमेंट एरिया को लेकर नयागांव के लिए हाईकोर्ट का यह आदेश एक तुगलकी फरमान है। अगर नयागांव के लोगों का ध्यान न रखते हुए एक तरफा फैसला आता है तो लोग अपने हक के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।  
- विधायक कंवर संधू, नयागांव
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें