पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा ने शिरोमणि अकाली दल के नाम से ही अपनी नई सियासी पारी का आगाज करके सभी को हैरत में डाल दिया है। करीब पांच दशक का सियासी तजुर्बा रखने वाले सीनियर ढींढसा एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश में हैं। जानकारों का मानना है कि नई पार्टी का नाम शिरोमणि अकाली दल रखकर ढींढसा पक्ष के नेता सार्वजनिक तौर पर अपने विरोधियों को बड़ा झटका देना चाहते हैं।
साथ ही यह चर्चा भी छिड़ गई है कि क्या इतिहास खुद को दोहराने जा रहा है। करीब 35 वर्ष पहले 1985 में अकाली दल की कमान, तत्कालीन मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला के पास थी और पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘तकड़ी’ ही था। तब पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल व सुखदेव सिंह ढींढसा का पूर्व सीएम बरनाला से छत्तीस का आंकड़ा था। दोनों नेताओं ने कानूनी लड़ाई का सहारा लेकर पूर्व सीएम बरनाला से पार्टी का चुनाव चिन्ह तकड़ी छीन लिया था।
सियासी माहिर मान रहे हैं कि पंजाब की जनता ठीक उसी तरह की कानूनी लड़ाई की गवाह फिर बन सकती है। मंगलवार को लुधियाना में मंच से ऐसे संकेत भी दिए गए कि पार्टी के नाम को लेकर यदि विवाद हुआ तो कानून का सहारा लिया जाएगा। खास बातचीत में सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा कि पार्टी के चुनाव चिन्ह व नाम को लेकर यदि जरूरत पड़ी तो कानून का सहारा लिया जाएगा। सुखबीर सिंह बादल तो पार्टी के अध्यक्ष ही नहीं हैं। उन्हें अध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया था और अब वह पार्टी के सदस्य हैं।