सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने अपने समर्थकों के साथ शिरोमणि अकाली दल का गठन कर पंजाब की राजनीति में बादल परिवार को एक चुनौती देने का प्रयास किया है। ढींढसा एसजीपीसी व 2022 के विधानसभा चुनाव में शिअद (बादल) को कितना राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकते हैं, यह तो समय तय करेगा। लेकिन अब पूर्व सांसद रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा की शिअद (टकसाली) के अस्तित्व कमजोर पड़ सकता है।
इस पार्टी की घोषणा करते समय कई ऐसे नेता भी मौजूद थे, जो ब्रह्मपुरा द्वारा घोषित शिअद (टकसाली) की स्थापना की समय भी थे। पिछले कुछ समय से ब्रह्मपुरा और ढींढसा के बीच वैचारिक मतभेदों को दूर करने का प्रयास कर रहे और टकसाली अकाली दल की सीनियर नेता सेवा सिंह सेखवां भी मौजूद थे। ब्रह्मपुरा के समर्थन में आए व अपनी नई पार्टी बनाने वाले दिल्ली कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके भी ढींढसा के समर्थन में आ गए हैं।
ब्रह्मपुरा की कई बैठकों में मौजूद रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया भी ढींढसा के साथ थे। इससे स्पष्ट है कि शिअद (टकसाली) का अस्तित्व कमजोर पड़ जाएगा। शिअद (टकसाली) के संस्थापक सदस्य पूर्व सांसद डॉ. रत्न सिंह अजनाला ने कहा कि ढींढसा को नई पार्टी स्थापित करने के स्थान पर शिअद (ट) की अगुवाई करनी चाहिए थी।