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नशे के नाश के लिए सुखबीर के सनसनीखेज दावे

Fri, 20 Jun 2014 12:19 PM IST
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
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लोकसभा चुनाव के दौरान ड्रग्स तस्करी का मुद्दा जोर पकड़ने के बाद पंजाब सरकार द्वारा तस्करों के खिलाफ चलाया गया अभियान जारी है। नशे के शिकार लोगों के इलाज के लिए व्यापक स्तर पर मुहिम शुरू की जा चुकी है। पिछले कुछ ही दिनों में कई सौ करोड़ के नशीले पदार्थ पकड़े जा चुके हैं। 150 बड़े तस्करों सहित बड़ी तादाद में छोटे पेडलरों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
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इस सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि ‘नशे से नाश’ के इस खतरनाक खेल को शुरुआत में ही नकेल क्यों नहीं डाली गई और देखते ही देखते कैसे यह पंजाब के हर गली-मोहल्ले तक पहुंच गया? वहीं, लोकसभा चुनाव में मुद्दा उछलने के बाद ही पंजाब सरकार नींद से क्यों जागी? ‘अमर उजाला’ ने इस बीमारी की जड़ों को लोगों के सामने लाने की दिशा में शुरू की गई अपनी मुहिम के तहत पंजाब के उप मुख्यमंत्री (गृह मंत्री) सुखबीर सिंह बादल से इसके विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की। प्रस्तुत हैं इसके मुख्य अंश :-

अभियान शुरू करने में इतनी देरी क्यों हुई

प्र. नशा तस्करी के खिलाफ अभियान शुरू करने में इतनी देरी क्यों हुई? लोकसभा चुनाव में मुद्दा उछला, अकाली-भाजपा गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा, तभी क्यों आपने इस ओर ध्यान दिया?
उ. ऐसा नहीं है। हम शुरू से ही इस बीमारी को मिटाने के लिए प्रयासरत हैं। पहले भी नशावृत्ति को समाप्त करना हमारी प्राथमिकता थी और 2012 में अकाली-भाजपा गठबंधन के लगातार दूसरी बार सत्ता के आने के बाद तो हमने नशावृत्ति के खिलाफ व्यापक मुहिम शुरू कर दी। ड्रग्स तस्करों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश पुलिस को दे दिए गए और अब यह अभियान अपनी कामयाबी के मुकाम पर लगभग पहुंच चुका है।

प्र. पंजाब में ड्रग तस्करी का जाल फैलने की मुख्य वजह क्या रही?
उ. अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर, मोटी कमाई और ऐशो-आराम की जिंदगी। पाकिस्तान से सटे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से नशा स्मगल होकर दिल्ली में बैठे बड़े सरगनों तक पहुंचता रहा और वहां से आगे देश के अन्य हिस्सों व विदेशी मंडी में। चूंकि यह पंजाब के रास्ते आगे जा रहा था, अत: प्रदेश का इसकी चपेट में आना स्वाभाविक था। इससे भी बढ़कर इस धंधे होने वाली मोटी कमाई और इस पैसे की चकाचौंध से होने वाली ऐश की वजह से लोग इस दलदल में धंसते ही चले गए। तस्कराें ने बड़ी-बड़ी संपत्तियां बना लीं। अब इन्हें जब्त करने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पंजाब में ड्रग तस्करी का जाल क्यों फैला?

प्र. पंजाब में ड्रग तस्करी का जाल फैलने की मुख्य वजह क्या रही?
उ. अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर, मोटी कमाई और ऐशो-आराम की जिंदगी। पाकिस्तान से सटे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से नशा स्मगल होकर दिल्ली में बैठे बड़े सरगनों तक पहुंचता रहा और वहां से आगे देश के अन्य हिस्सों व विदेशी मंडी में। चूंकि यह पंजाब के रास्ते आगे जा रहा था, अत: प्रदेश का इसकी चपेट में आना स्वाभाविक था। इससे भी बढ़कर इस धंधे होने वाली मोटी कमाई और इस पैसे की चकाचौंध से होने वाली ऐश की वजह से लोग इस दलदल में धंसते ही चले गए। तस्कराें ने बड़ी-बड़ी संपत्तियां बना लीं। अब इन्हें जब्त करने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

प्र. क्या इससे पहले ड्रग्स तस्करों की जायदाद जब्त करने की कार्रवाई न होना भी धंधे के पैर पसारने की वजह रही? प्रॉपर्टी अटैच करने की कार्रवाई पहले क्यों नहीं की जाती थी, जबकि एनडीपीएस एक्ट में इसका प्रावधान मौजूद है?
उ. काफी हद तक। इसमें कोई दो राय नहीं कि ड्रग तस्करों द्वारा नशे की काली कमाई से बनाई गई प्रॉपर्टी जब्त करने का प्रावधान एक्ट में है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी जटिल थी। इसलिए पुलिस इस तरफ ध्यान ही नहीं देती थी। अब इस प्रक्रिया को सरल बनाकर कार्रवाई शुरू की जा रही है। जल्द ही तस्करों की जायदादों से संबंधित जानकारी इकट्ठा करके इसकी अटैचमेंट की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

अभियान को आप कितना कामयाब मानते हैं

प्र. पुलिस के हाल ही के अभियान को आप कितना कामयाब मानते हैं?
उ. बहुत। हमने ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़ दी है। अब नशे की सप्लाई नाममात्र रह गई है। गली-मोहल्लों में सक्रिय ड्रग पेडलर पकड़ में आ चुके हैं। बड़े तस्कराें में से करीब डेढ़ सौ पकड़े जा चुके हैं, जबकि 50-60 की तलाश जारी है। अब तो नशावृत्ति के शिकार लोगों के इलाज का काम चल रहा है, ताकि वह इस बीमारी से निजात पा सकें।

प्र. इस बात की क्या गारंटी है कि यह सख्ती आगे भी यूं ही जारी रहेगी?
उ. यह अभियान रुकने वाला नहीं है। पंजाब स्टेट नारकोटिक्स ब्यूरो का गठन इसी बात को ध्यान में रखकर किया गया है। पुलिस सहित ब्यूरो के अधिकारी तस्करी व तस्करों पर हर वक्त पैनी नजर रखेंगे।

बड़ी मछलियों पर हाथ ही नहीं डाला जा रहा?

प्र. यह आरोप आम है कि पुलिस छोटे-छोटे नशेड़ियों को पकड़ कर ड्रग्स स्मगलर बना रही है, जबकि बड़ी मछलियों पर हाथ ही नहीं डाला जा रहा?
उ. किसी भी गलत आदमी को बख्शा नहीं जा रहा। जिन छोटे-छोटे पेडलरों की बात की जा रही है, उनमें से अधिकतर नशे के भी आदी हैं। उनका इलाज करवाया जा रहा है। यह कहना गलत है कि नशेड़ी व्यक्ति नशा तस्कर नहीं हो सकते।

प्र. चुनाव के दौरान और बाद में ड्रग तस्करों, राजनेताओं तथा पुलिस वालों के नेक्सस की बातें चलती रहीं? आपका क्या कहना है?
उ. ड्रग्स तस्कर पकड़े जा रहे हैं, जबकि इस काम में संलिप्त पाए गए पुलिस वालों को डिसमिस किया गया है। रही बात नेताओं की तो एक भी ड्रग्स तस्कर को छोड़ने के लिए किसी भी राजनीतिक व्यक्ति ने पहुंच नहीं की है। ऐसे में हम कैसे कह सकते हैं कि राजनेताओं का इस धंधे में हाथ है। बयानबाजी करना तो बहुत आसान है, लेकिन आरोपों को प्रमाणित करना बहुत कठिन होता है। एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि इस धंधे में संलिप्त किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो।
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कब तक यह तस्करी पूरी तरह से रुक पाएगी?

प्र. चुनाव के दौरान आपकी तरफ से लगातार कहा गया कि पाकिस्तान से होने वाली ड्रग्स तस्करी रोकने की जिम्मेदारी केंद्र की है। राजस्थान से सटे अंतरराज्यीय बॉर्डर से आने वाली भुक्की आदि के लिए भी केंद्र की ही जिम्मेदारी बताई गई। अब केंद्र में आपकी सरकार है। राजस्थान में भी भाजपा की सरकार है। कब तक यह तस्करी पूरी तरह से रुक पाएगी?
उ. हमारी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात हुई है। उनके साथ यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया है। मोदी और राजनाथ खुद इसको लेकर गंभीर हैं। पाकिस्तान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा को जल्द ही प्रभावी रूप से सील कर दिया जाएगा। राजस्थान सीमा से होने वाली तस्करी को रोकने के लिए भी पुख्ता कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, पंजाब पुलिस तो स्थिति पर पैन नजर रखे ही हुए है।

प्र. क्या उम्मीद की जा सकती है कि आपकी इस सरकार के कार्यकाल में पंजाब नशा मुक्त हो जाएगा?
उ. हमारा पूरा जोर इसी पर लगा हुआ है और नतीजे सामने दिखाई पड़ रहे हैं।
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