शिरोमणि अकाली दल की प्रतिनिधि सभा में शनिवार को सुखबीर सिंह बादल को तीसरी बार शिअद (बादल) का तीसरी बार सर्वसम्मति से अध्यक्ष पद निर्वाचित कर लिया गया। सुखबीर बादल अकाली दल के 22वें अध्यक्ष बन गए हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी परिसर स्थित ऐतिहासिक तेजा सिंह समुंद्री हॉल में आयोजित शिअद की प्रतिनिधि सभा में जत्थेदार तोता सिंह ने अध्यक्ष पद के लिए सुखबीर बादल के नाम का प्रस्ताव पेश किया।
पूर्व सांसद प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा और कभी बादल परिवार के विरोधी रहे जगमीत बराड़ ने सुखबीर के नाम का अनुमोदन किया। प्रतिनिधि सभा द्वारा अध्यक्ष पद के लिए दूसरे किसी भी सदस्य का नाम पेश करने से इंकार करने के बाद चुनावी पर्यवेक्षक सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़ ने जयकारों की गूंज से सुखबीर बादल के सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित होने की घोषणा कर दी।
इसके साथ ही प्रतिनिधि संस्था ने प्रकाश सिंह बादल को फिर एक बार दल के सरपरस्त की जिम्मेदारी सौंप दी। प्रतिनिधि सभा ने पार्टी के पदाधिकारियों व अन्य विंगों के चयन के अधिकार सौंप दिए। अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद सुखबीर ने प्रतिनिधि सभा में उपस्थित वरिष्ठ अकाली नेताओं का हाथ जोड़ कर अभिनंदन किया। भूंदड़ ने सुखबीर बादल को सिरोपा, श्री साहिब और दस्तार भेंट कर सम्मानित किया।
उक्त दोनों अकाली लीडर अब बादल परिवार के विरोध में
मंच का संचालन कर रहे डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने अकाली दल के सविधान के संशोधन का एक प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव के अनुसार शिअद के पदाधिकारियों की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। अब 15 सीनियर वरिष्ठ उपाध्यक्ष, 12 कनिष्ठ उपाध्यक्ष, एक सेक्रेटरी जनरल, 15 संगठन सचिव और चार मीडिया सचिव के साथ अन्य पदों की भी संख्या बढ़ाई गई है।
इसके साथ ही अब शिअद की वर्किंग कमेटी के साथ-साथ कोर कमेटी के सदस्यों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। अब शिअद के ढांचे में दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों का वर्किंग कमेटी में शामिल किया जाएगा। शिअद के इस संविधान संशोधन पर प्रतिनिधि सभा ने जयकारों से स्वीकृति दी।
संविधान संशोधन के अन्य प्रस्ताव में अब 25 हजार मतदाताओं पर एक सर्कल अध्यक्ष का चुनाव होगा। इसके साथ ही सर्कल की भौगोलिक स्थिति का कम या अधिक करने के लिए पार्टी अध्यक्ष की मंजूरी जरूरी होगी। जिन कस्बों व शहरी हलकों में मतदाताओं की संख्या 50 हजार से अधिक होगी, वहां वार्ड स्तर तक भर्ती की जाएगी। इन शहरों के चार वार्ड को एक साथ जोड़ कर एक सर्कल बनाया जाएगा।
प्रो च़ंदूमाजरा ने कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या सीमित करने की मांग भी सुखबीर से की। चंदूमाजरा का कहना था कि अधिक पदाधिकारियों के कारण कई बार समस्याओं का सामना करना पड़ता है। डॉ. चीमा ने एक 45 पेज की रिपोर्ट को बिना पढ़े ही प्रतिनिधि सभा से पारित करवा लिया। इस रिपोर्ट में अकाली दल को अलग-अलग औद्योगिक और अन्य साधनों से मिले फंड का उल्लेख था।
अध्यक्ष चुनाव में पहली बार गैरहाजिर रहे प्रकाश सिंह बादल
शिअद के बीते 50 वर्ष के इतिहास में यह पहला अवसर था, जब अकाली दल के सुप्रीमो प्रकाश सिंह बादल अध्यक्ष पद के चुनाव में मौजूद नहीं थे। डॉ. चीमा के अनुसार सेहत ठीक न होने के कारण बड़े बादल चुनाव में हिस्सा नहीं ले सके हैं। इस सभा में प्रकाश सिंह बादल की पार्टी के प्रति निभाई गई सेवा पर भी प्रस्ताव पारित किया गया।
अकाली दल से बागी हो चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा के बेटे विधायक परमिंदर सिंह ढींढसा भी प्रतिनिधि सभा में शामिल नहीं हुए। परमिंदर ढींढसा की गैरहाजिरी पर स्पष्टीकरण देते हुए बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि वह अकाली दल के साथ हैं। किसी कारण वश वह सभा में भाग नहीं ले सके।
शनिवार को केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल भी अध्यक्ष पद के चुनाव की कार्रवाई देखने के लिए सभा में मौजूद थी। हरसिमरत कौर पहली बार अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रतिनिधि सभा में शामिल हुईं।