चंडीगढ़ नगर निगम के पार्षद फिर से लाखों खर्च करके स्टडी टूर पर जा रहे हैं और वो भी उस जगह, जहां वे पहले भी दो बार चुके हैं। 30 जुलाई को बंगलूरू और मैसूर जाने के लिए रवाना हो जाएंगे। जबकि इससे पहले 2004 और 2010 में पहले भी पार्षद स्टडी टूर पर जा चुके हैं। लेकिन इन टूरों का नगर निगम और शहर को अभी तक कोई फायदा नहीं मिला है। प्रशासन ने पार्षदों के इस नए टूर को शुक्रवार को मंजूरी दे दी है।
निगम के अनुसार पार्षद बंगलूरू और मैसूर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और साफ सफाई की व्यवस्था की स्टडी करेंगे। पिछले साल केंद्र सरकार की ओर से किए गए सर्वे में मैसूर का साफ सफाई में रैंक भी चंडीगढ़ से ऊपर था। प्रशासन से मंजूरी के बाद निगम ने अब 36 पार्षदों से उनकी ऑप्शन पूछी गई है। इस स्टडी पर लाखों रुपये का खर्च सरकारी खजाने से किया जाएगा। मालूम हो कि अभी तक जितने भी स्टडी टूर गए हैं इन टूर की रिपोर्ट कभी भी लागू नहीं हुई है।
टूर में पार्षद की हो चुकी है मौत
2014 में पार्षद चेन्नई, कोलकता और पोर्ट ब्लेयर के स्टडी टूर पर गए थे। इस टूर में उस समय अकाली पार्षद मलकीयत सिंह की तबीयत खराब होने से मौत भी हो गई थी। उसके बाद अब टूर जा रहा है। लेकिन उस टूर में अध्ययन किए काम का कोई फायदा अभी तक शहर को नहीं मिला है। इस विवादित स्टडी टूर के लिए 13 पार्षदों से 9-9 हजार रुपये की रिकवरी भी ली गई थी। जिन 13 पार्षदों से रिकवरी ली गई है उनमें वर्तमान में मेयर अरुण सूद के अलावा पूर्व मेयर पूनम शर्मा, पूर्व डिप्टी मेयर गुरबख्श रावत, आशा जसवाल, शीला देवी, सतीश कैंथ, बाबूलाल, गुरचरण दास काला और एमपी कोहली का नाम शामिल है। ये पार्षद अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को सरकारी टूर पर साथ ले गए थे। जिससे टूर का खर्च बढ़ गया था।
एक करोड़ 42 लाख हो चुके हैं खर्च
2004 से लेकर अब तक के स्टडी टूर पर पार्षदों ने 1 करोड़ 42 लाख रुपये का खर्च किए हैं। 2010 और 2011 में सबसे ज्यादा राशि बर्बाद हुई है। 2010 में पांच स्टडी टूरों पर नगर निगम के सरकारी खजाने से 58 लाख 7 हजार 23 रुपये की राशि खर्च हुई है। अधिकतर पार्षद स्टडी टूर के पक्ष में हैं। लेकिन भाजपा के इकलौते पार्षद सतिंदर सिंह ऐसे हैं जो कि स्टडी टूर के विरोध में है।
इस स्टडी टूर पर सिर्फ पार्षद ही जा सकते हैं। परिवार का कोई सदस्य साथ ले जाने की मंजूरी नहीं है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत हुए सर्वे में मैसूर का प्रथम स्थान था। इसलिए वहां की व्यवस्था को देखना जरूरी है। जबकि बंगलूरू नगर निगम दो बड़े मेडिकल अस्पताल चला रहा है। इसके बाद पार्षद हैदराबाद में एक ट्रेनिंग शिविर में भी भाग लेने जाएंगे। यह कैंप अमरूत स्कीम के तहत लग रहा है।
-अरुण सूद, मेयर