पंजाब के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहाल उधार के ज्ञान पर शिक्षा ले रहे हैं। स्कूल खुलने के सात दिन बाद भी नए शिक्षण सत्र की किताबें विद्यार्थियों को नहीं मिल पाई हैं, जिसके कारण छात्र-छात्राएं सीनियर विद्यार्थियों से किताबें मांगकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराता है।
बोर्ड निशुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण के लिए शिक्षा विभाग की किताबें प्रिंट और आपूर्ति करता है। इस बार अभी तक किताबों के प्रिंट होने का कार्य नहीं होने के कारण इनका वितरण नहीं हो पाया है, जिसके कारण गैर बोर्ड कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को अस्थायी व्यवस्था के तौर पर अपने वरिष्ठों से पाठ्यपुस्तकें उधार लेनी पड़ रही हैं। इस समस्या से सबसे ज्यादा बोर्ड कक्षाओं के नए छात्र-छात्राओं को नुकसान हो रहा है। इसका कारण यह है कि वे वरिष्ठ विद्यार्थियों से पाठ्यपुस्तकें भी उधार नहीं ले सकते, क्योंकि उनकी अगले महीने बोर्ड की परीक्षाएं हैं।
स्कूल प्रबंधनों की ओर से इस समस्या से उबरने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। इधर, विपक्षी दल के नेताओं ने विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने में देरी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। नेताओं ने आरोप लगाया है कि नई आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के वादे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन लगता है कि वह अपनी पहली परीक्षा में विफल रही है।
शिक्षकों को आ रही परेशानी
शिक्षकों का कहना है कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को सत्र शुरू होने से एक सप्ताह पहले पाठ्यपुस्तकों को प्रिंट कर ब्लॉक स्तर पर भेज देना चाहिए ताकि छात्रों को परेशानी न हो। अभी तक छात्रों को एक भी पाठ्यपुस्तक प्रदान नहीं की गई है। पाठ्यपुस्तकें नहीं होने के कारण पढ़ाने में दिक्कत आ रही है।
हम 20 अप्रैल तक जिला मुख्यालयों को पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगले 10 दिन में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें मिल जाएंगी। - डॉ. योगराज, चेयरमैन, पीएसईबी