पुतला फूंकने से पूर्व विद्यार्थियों ने प्रबंधन को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लेने की मांग की थी लेकिन उनकी एक न सुनी गई। पीयू प्रशासन, चंडीगढ़ पुलिस और कुलपति के मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए विद्यार्थियों ने प्रो. रेनु विग और विक्रम सिंह का पुतले को आग के हवाले कर दिया। विद्यार्थियों पर एफआईआर मुख्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से दर्ज करवाई गई, इसलिए उनका भी पुतला जलाया गया।
छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के तानाशाही रवैये पर भी तंज कसा। विद्यार्थियों के लगातार प्रदर्शन के बावजूद सीनेट चुनाव को लेकर पीयू प्रबंधन ने कोई घोषणा नहीं की है। एक माह के अंतराल में पंजाब के आप, अकाली दल और कांग्रेस के सांसद, विधायक और अन्य नेता धरनास्थल पर आकर विद्यार्थियों का समर्थन कर चुके हैं। विद्यार्थी सीनेट चुनाव न करवाने के पीछे केंद्र सरकार की ओर से पीयू की गर्वनिंग बॉडी के लोकतांत्रिक मूल को समाप्त करने और उसे केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने का आरोप लगा रहे हैं।
बीते कल विद्यार्थियों ने सेक्टर-32 और 11 के कॉलेज में सीनेट चुनाव के लिए धरना प्रदर्शन किया। आंदोलन को तेज करते हुए विद्यार्थियों ने 26 नवंबर को पीयू का गेट नं. एक बंद करने की घोषणा की है। पीयू प्रबंधन की ओर से छात्रों की मांगें नहीं सुनी गई तो छात्र गेट नं. को बंद करेंगे।
छात्रों पर की जा रही दबाव बनाने की कोशिश :
13 नवंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के पीयू दौरे के समय पुलिस की ओर से छात्रों पर लाठी बरसाई गईं थीं और मुख्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से 14 छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई। विद्यार्थी सीनेट चुनाव के साथ उन पर हुई एफआईआर वापस लेने की मांग कर रहे हैं लेकिन अभी तक शिकायत वापस नहीं ली गई है। छात्र नेताओं का कहना है कि एफआईआर के जरिये वह छात्रों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।