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स्टूडेंट्स को कंफर्ट जोन से बाहर निकलने को कहा, हमेशा आगे बढ़ते रहने की सलाह

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चंडीगढ़। सेक्टर-32 स्थित जीजीडी एसडी कॉलेज में शनिवार को टेड-एक्स के पांचवें संस्करण का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने स्टूडेंट को अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर आगे बढ़ते रहने की सलाह दी। साथ ही युवाओं को आगे बढ़ने के लिए मूलमंत्र के साथ नए ऑडिया खोजने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तित्वों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने अपने अनुभवों को स्टूडेंट्स और उपस्थित सदस्यों के साथ सांझा किया।
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कार्यक्रम की थीम ‘एपरोचिंग इनफिनिटी’ रखी गई ताकि युवाओं को सफलता के मायने का पता चल सके। इस अवसर पर कॉलेज के प्रबंधन प्रिंसिपल डॉ. बलराज थापर के अलावा 100 से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया। एक दिवसीय इस इवेंट में 8 स्पीकर ने अपनी बात स्टूडेंट्स के सामने रखी। मशहूर गायक जुबिन नौटियाल ने एक स्वतंत्र म्यूजिशियन बनने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सफलता हासिल करने के बाद उसे निरंतर रूप से आगे बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती है। इस सफलता को आगे बढ़ाने के लिए केवल एक ही रास्ता है वह है नए-नए ऑडिया जिससे हम सफलता को कभी नीचे नहीं गिरने देते है। ताराल्टेक सॉल्यूशंस के सह-संस्थापक अंजन मुखर्जी ने अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने किस तरह से देश के गांवों में जाकर अंडरवाटर ट्रीटमैंट पर काम किया। उन्होंने कहा कि इस काम को पहले तो उन्होंने केवल ऐसे ही शुरू किया था लेकिन जब उन्होंने इस काम में अपने ऑडिया लगाने शुरू किए तो उन्हें सफलता मिलती गई और उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। उन्होंने बताया कि इस कार्य में भारत सरकार की भी मदद कर रही है जो केवल नए ऑडिया और मेहनत से हुआ है।
सेलिब्रिटी शेफ अजय चोपड़ा ने कहा कि सभी को अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना चाहिए, तभी कुछ नया कर सकते हैं। वहीं, रेस्ट ऑफ माई फैमली (एनजीओ) के सह-संस्थापक पीयूष गोस्वामी ने बताया कि वह पहले फोटोग्राफी करते थे लेकिन उसको करने के दौरान एक वाकया ऐसा हुआ जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। उसके बाद उन्होंने रेस्ट ऑफ माई फैमली एनजीओ का गठन किया और आज वह पूरे भारत में जनजातियों के पुनर्वास का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि वह अभी कई जनजातियों का पुनर्वास कर चुके है। इस मौके पर स्मार्ट विजएक्स के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक तिथी तिवारी, दलाई लामा के आधिकारिक अनुवादक वीन गेशे ला दोरजी दामदुल आदि ने भी स्टूडेंट्स के सामने अपने विचार रखे।
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