हरियाणा बोर्ड की दसवीं कक्षा में फेल होने से निराश करनाल जिले के गांव पुंडरी की छात्रा बुलबुल (15) ने जहरीला पदार्थ निगल लिया। उसकी अस्पताल में मौत हो गई।
परिजनों के मुताबिक बुलबुल गणित, सामाजिक विज्ञान और साइंस में फेल हो गई थी। इस वजह से वह निराश थी।
उधर, सोनीपत जिले के गांव मातंड में 12वीं की परीक्षा में कम अंक आने से परेशान छात्र रवि ने घर में फंदा लगाकर जान दे दी।
रवि 82 प्रतिशत अंक के साथ पास हुआ था। परिजनों ने बताया कि रवि को अधिक अंक आने की उम्मीद थी। उसके अंक कुछ सहपाठियों से भी कम थे। इससे वह परेशान था। शुक्रवार दोपहर बाद घर में एक कमरे के साथ बने स्टोर में गया और छत में लगी कुंडी से कपड़ा बांधकर फंदा लगा कर जान दे दी। दोनों ही मामलों में पुलिस जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।
अंक नहीं, ज्ञान महत्वपूर्ण
अभिभावक और शिक्षक बच्चों पर अधिक अंक लाने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं। जबकि बच्चे को समझाना चाहिए कि अंकों की दौड़ में शामिल होने के बजाय वह ज्ञान प्राप्त करे। स्कूलों में भी बच्चों को इस तरह की सीख नहीं दी जाती कि अंक कोई पैरामीटर नहीं है।
माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चे पर अंकों का दबाव बनाने के बजाय उसे अच्छे से पढ़ाई करने को प्रेरित करें, जिससे वह खुद पर दबाव महसूस न करे। परीक्षा में अंक नहीं ज्ञान मायने रखता है। इसी से भविष्य में सफलताएं मिलती हैं।
-डॉ. संतराम देशवाल, शिक्षाविद।