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Haryana: हर साल 147 करोड़ खर्च के बावजूद पराली प्रबंधन बना चुनौती, जमीनी स्तर नहीं दिख रहा असर

Tue, 04 Oct 2022 01:12 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

बासमती की पराली को किसान पशुओं के चारे के रूप में प्रयोग करते हैं और गैर बासमती (पीआर) की पराली को खेतों में जलाते हैं। अनुमान है कि इस बार पीआर धान की 36.7 लाख मीट्रिक टन पराली निकलेगी, जिसमें से 15 प्रतिशत ही प्रबंधन हो पा रहा है और शेष पराली को जलाया जा रहा है।
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पराली की समस्या।
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विस्तार
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पराली प्रबंधन हरियाणा सरकार के लिए चुनौती बन गया है। तमाम कोशिशों के बावजूद जमीनी स्तर पर इसका असर नहीं दिख रहा है। प्रबंधन के नाम पर हर साल औसतन 147 करोड़ रुपये राज्य में खर्च होते हैं। बावजूद इसके पराली जलाने के मामलों में कमी नहीं आ रही है। बंदिशों के बावजूद बेधड़क पराली जलाई जा रही है।

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दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता प्रदूषण हर साल मुद्दा बनता है। इसके लिए दिल्ली हरियाणा को जिम्मेदार ठहराती रही है। एनजीटी से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामले को लेकर सख्त टिप्पणी कर चुके हैं। प्रदूषण कम करने और पराली के स्थायी प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरियाणा को पिछले चार साल में 693.25 करोड़ रुपये का मिल चुके हैं। इनमें से अब तक 591 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस राशि से पराली प्रबंधन के लिए प्लांट लगाने से लेकर मशीनरी और उपकरण खरीदे गए हैं लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से पूरी ताकत झोंक देने के बावजूद जमीनी स्तर पराली जलाने के मामलों में कमी नहीं आ रही है। सरकार के लिए फसल अवशेष प्रबंधन अब चुनौती बन गया है। 

36.7 लाख मीट्रिक टन पराली का करना है प्रबंधन
हरियाणा में इस बार धान का रकबा 13.40 लाख हेक्टेयर है। 7 लाख हेक्टेयर में बासमती और शेष रकबे में गैर-बासमती धान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने रकबे में से औसतन 70 लाख मीट्रिक टन पराली निकलेगी। बासमती की पराली को किसान पशुओं के चारे के रूप में प्रयोग करते हैं और गैर बासमती (पीआर) की पराली को खेतों में जलाते हैं। अनुमान है कि इस बार पीआर धान की 36.7 लाख मीट्रिक टन पराली निकलेगी, जिसमें से 15 प्रतिशत ही प्रबंधन हो पा रहा है और शेष पराली को जलाया जा रहा है।

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आंकड़ों में खर्च और जली पराली

  • साल          खर्च राशि           पराली जली
  • 2021       151 करोड़            3.54 लाख हेक्टेयर
  • 2020       205.75 करोड़       2.16 लाख हेक्टेयर
  • 2019       101.49 करोड़       2.37 लाख हेक्टेयर
  • 2018      132.86 करोड़        2.45 लाख हेक्टेयर 
तीन साल में 700 किसान गिरफ्तार, दो करोड़ रुपये जुर्माना 
तीन साल की बात करें तो पराली जलाने पर तीन हजार से अधिक किसानों पर केस दर्ज किए गए। इनमें 700 के करीब किसानों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही दो करोड़ रुपये से अधिक जुर्माना किया गया है। साल 2019 में 397 किसान गिरफ्तार किए और 37 लाख रुपए जुर्माना किया। इसी प्रकार, वर्ष 2020 में 339 किसान गिरफ्तार किए गए और कुल एक करोड़ रुपये जर्माना किया। 2021 में 100 किसानों के खिलाफ केस दर्ज किए और 82 लाख का जुर्माना किया लेकिन गिरफ्तारी किसी की नहीं हुई। 

एक टन पराली जलाने से हवा में तीन किलो कार्बन कण, 50 किलो कार्बन डाईआक्साइड, 92 किलो कार्बन मोनोआक्साइड, 3.83 किलो नाइट्रस ऑक्साइड, 0.4 किलो सल्फर डाईआक्साइड, 2.7 किलो मीथेन और 200 किलो राख घुल जाती हैं। ये प्रदूषक वातावरण में फैल जाते हैं, भौतिक और रासायनिक परिवर्तन से गुजर कर स्मॉग की मोटी चादर बनाते हैं। इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। - पी राघवेंद्र राव, चेयरमैन, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

पराली प्रबंधन के लिए हरियाणा सरकार तमाम प्रयास कर रही है। इसमें किसानों को मशीनरी उपलब्ध कराने के लेकर अनुदान व अन्य योजनाएं शुरू की गई हैं। पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने के मामलों में कमी आई है। पर्यावरण बचाना सभी के लिए जरूरी है, इसलिए किसानों के साथ-साथ हर आम व खास व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।  - हरदीप सिंह, महानिदेशक, कृषि विभाग।
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