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पंजाब के इन 15 गांवों में किसानों ने जमकर जलाई पराली, सेटेलाइट ने पकड़ा...कार्रवाई शुरु

Tue, 06 Nov 2018 09:23 AM IST
अनिल कुमार, अमर उजाला, फतेहगढ़ साहिब(पंजाब)
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सांकेतिक तस्वीर
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पंजाब में सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी पराली जलाने का सिलसिला लगातार जारी है। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब के 15 गांवों में पराली जलाने की सेटेलाइट रिपोर्ट आई है।  जानकारी के अनुसार जिले के गांव पोला, बहलोलपुर समेत जीटी रोड माधोपुर की दोनों ओर खेतों में धान की फसल काटने के बाद किसान अवशेषों को सरेआम आग लगा रहे हैं और पराली के धुएं से राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

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साथ ही खेतों से उठ रहे जहर के प्रति न तो किसान सजग हैं और न ही प्रशासन इसकी निगरानी कर रहा है। सड़कों में गहरे धुएं के कारण दुर्घटना की संभावनाएं बढ़ गई हैं। बता दें कि कुछ साल पहले खेत में लगाई गई आग के बाद धुएं से पैदा हुई विकट स्थिति से फाटक माजरी गांव के पास सड़क हादसा हुआ था, जिसमें लड़की समेत एक सरकारी अधिकारी की मौत हो गई थी। इसके बावजूद किसान सरेआम नियमों को ताक पर रखकर आग लगाने में जुटे हैं।

प्रदूषण विभाग करेगा कार्रवाई : एक्सईन
इस बारे जिला प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के कोआर्डिनेटर कम एक्सईएन विजय कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सोमवार को सेटेलाइट के जरिये हमें जिले के करीब 15 गांवों में पराली जलने की सूचना मिली है। जिसमें विभाग कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि 2 एकड़ में पराली जलाने के लिए 1500 और 5 एकड़ से ऊपर वाले खेत में पराली जलाने पर 15000 का चालान है। जिले में एसडीएम तथा तहसीलदार स्तर पर विभिन्न जांच कमेटियां बनीं हैं और सेटेलाइट अलग तौर पर खेतों में लगी आग की रिपोर्ट भेजता है।

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पुलिस को सूचना दी जाए

सांकेतिक तस्वीर
जिले के एक कृषि अफसर के साथ इस मुद्दे पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग आए दिन जागरूकता सेमिनार करा रहा है। इसके बावजूद अगर कोई ऐसा करता है तो इसकी सूचना पुलिस को दी जाए।

किसानों की मदद करे सरकार
समाजसेवी दमनजीत सिंह भल्लमाजरा और मनदीप सिंह पोला ने कहा कि सरकार किसानों की फसल का सही दाम दे तो किसान धान की पराली को आग नहीं लगाएंगे, क्योंकि जो छोटे किसान हैं उनके पास महंगे कृषि उपकरण रोटावेटर, बेलर, एसएमएस सिस्टम नहीं है। मजबूरी में किसान धान के नाड़ को आग लगाते हैं। सरकार को कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने में छोटे किसानों के साथ सहयोगपूर्ण रवैया अपनाना होगा न कि उन पर कार्रवाई की जाए।
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