प्रदर्शन में विद्यार्थियों के साथ वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक भी शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं हो सकता। युवाओं की आवाज को लाठी के दम पर नहीं दबाया जा सकता।
काली पट्टी से ढके चेहरे... पांच मिनट की खामोशी... हाथों में पोस्टर... और प्रदर्शनकारियों के बीच लग रहा मोमोज का लंगर। देशभर में नीट पेपर लीक विवाद और दिल्ली में विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज के विरोध की गूंज शुक्रवार को दूसरे दिन भी चंडीगढ़ की सड़कों पर सुनाई दी। सेक्टर-17 प्लाजा में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, रिसर्च स्कॉलर और युवा जुटे।
विरोध का यह प्रदर्शन केवल नारों तक सीमित नहीं रहा बल्कि खामोशी को भी आंदोलन की सबसे बुलंद आवाज बना दिया। किसी ने पानी पिलाकर तो किसी ने मोमोज का लंगर लगाकर आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई।
दूसरी ओर पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट सेंटर पर भी छात्रों ने प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। दोनों स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली लाठीचार्ज की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच, पेपर लीक मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग उठाई।
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चंडीगढ़ में प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
सेक्टर-17 में प्रदर्शन की शुरुआत इंकलाब जिंदाबाद, पेपर लीक से आजादी, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो और लड़ते लोग जिंदाबाद जैसे नारों से हुई। इसके बाद छात्रों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर पांच मिनट का मौन धारण किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शांतिपूर्ण आवाज को बल प्रयोग से दबाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार गंभीर नहीं है और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
प्रदर्शन में विद्यार्थियों के साथ वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक भी शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं हो सकता। युवाओं की आवाज को लाठी के दम पर नहीं दबाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं होगी, शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा।
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चंडीगढ़ में प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
जब आठ साल की बच्ची ने पूछा... हमारे भविष्य का क्या होगा
प्रदर्शन का सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया, जब जीरकपुर की आठ वर्षीय सचलीन अपने हाथ से बनाया पोस्टर लेकर पहुंची। उसने कहा कि मुझे अपने भविष्य और पढ़ाई की चिंता है। नन्हे हाथों में थामा उसका पोस्टर पूरे प्रदर्शन का आकर्षण बना रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने उसकी हौसला अफजाई की।
इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है...
पंजाब विश्वविद्यालय की छात्रा वृषैली ने जमीन पर रंगों से भगत सिंह का मशहूर कथन इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है... लिखकर विरोध दर्ज कराया।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता वर्णिका कुंडु ने कहा कि विद्यार्थी किसी विशेष सुविधा की नहीं बल्कि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था,सुरक्षित माहौल और न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग दोहराई।
पीपल का पेड़ फिर बना संघर्ष का गवाह
सेक्टर-17 प्लाजा का दशकों पुराना पीपल का पेड़ शुक्रवार को एक बार फिर लोकतांत्रिक संघर्ष की सबसे मजबूत पहचान बन गया। नीट पेपर लीक और दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में सैकड़ों विद्यार्थी, रिसर्च स्कॉलर, सामाजिक कार्यकर्ता, अभिभावक और आम नागरिक इसी पीपल की छांव तले जुटे। हाथों में पोस्टर, आंखों में उम्मीद और न्याय की मांग के साथ यह स्थान पूरे दिन युवाओं की आवाज से गूंजता रहा।
पोस्टरों पर लिखे संदेश व्यवस्था से जवाब मांग रहे थे जबकि प्रदर्शनकारी निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे थे। कोई जमीन पर बैठकर समर्थन जता रहा था तो कोई नारे लगाकर युवाओं का हौसला बढ़ा रहा था। शांतिपूर्ण माहौल में चल रहा यह प्रदर्शन बताता रहा कि जब मुद्दा युवाओं के भविष्य का हो तो समाज के हर वर्ग की भागीदारी स्वतः बढ़ जाती है।
शहर बसने के शुरुआती दौर से लेकर कर्मचारियों के आंदोलन, छात्रों के धरनों, सामाजिक अभियानों और जन आंदोलनों तक यह ऐतिहासिक पीपल अनगिनत संघर्षों का साक्षी रहा है।
शुक्रवार को एक बार फिर उसी इतिहास में नया अध्याय जुड़ गया। ऐसा लगा मानो यह पुराना पेड़ खामोशी से कह रहा हो कि चेहरे बदलते हैं, संघर्ष बदलते हैं, लेकिन न्याय की आवाज कभी नहीं थमती।
सेक्टर-21 निवासी राजन पाल सिंह ने बताया कि पिछले करीब 50 वर्षों से यह पीपल शहर के हर बड़े आंदोलन का गवाह रहा है। वहीं एडवोकेट विपिन कुमार ने कहा कि पिछले दस वर्षों में वे कई प्रदर्शनों में शामिल हुए हैं और हर बार आंदोलनकारियों की पहली पसंद यही पीपल की छांव रही है।