केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की एसोसिएशन को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से सीधी मान्यता दिलाने की जंग एक बार फिर से शुरू हो चुकी है। इसके लिए बीसीसीआई द्वारा गठित पूर्व भारतीय क्रिकेटरों की दो सदस्यीय समिति ने मंगलवार को शहर में क्रिकेट की सुविधाओं का जायजा लिया और इंफ्रास्ट्रक्चर को देखा।
इस टीम में पूर्व क्रिकेटर सबा करीम और अंशुमन गायकवाड़ ने सेक्टर- 16 स्थित क्रिकेट स्टेडियम, जीएमएसएसएस सेक्टर- 26 और आईटी पार्क स्थित महाजन क्रिकेट अकादमी का दौरा किया। शहर में इस समय चंडीगढ़ की तीन क्रिकेट एसोसिएशन हैं। इनमें यूटी क्रिकेट एसोसिएशन, पंजाब से मान्यता मिली चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन और हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन से मान्यता प्राप्त चंडीगढ़ क्रिकेट एसोसिएशन शामिल हैं।
तीनों ही एसोसिएशन ने समिति के सदस्यों से मुलाकात कर मान्यता के लिए दावा किया है। अब यह दो सदस्य मान्यता समिति बीसीसीआई को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। तीनों ही एसोसिएशन मान्यता को लेकर सकारात्मक रूप से आश्वस्त हैं।
18 वर्ष पहले भी बनी थी समिति
वर्ष 2001 में इस तरह से एक समिति का गठन किया गया था। इसमें तीन सदस्यीय सदस्य थे। उस कमेटी ने सेक्टर-16 क्रिकेट स्टेडियम का दौरा किया था, जिसने ज़ी अपनी रिपोर्ट बोर्ड को सौंपी थी। 18 वर्षों के बाद जी मान्यता को लेकर इंतजार अब तक जी जारी है। मान्यता मिलने से बीसीसीआई की सीनियर स्तर के घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट में चंडीगढ़ की प्रतिभागिता सीधे तरीक से संभव हो सकेगी।
यूटी क्रिकेट एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल मिला
यूटी क्रिकेट एसोसिएशन की पैरलल एसोसिएशन से संबंध रखने वाले दो सदस्य यादविंदर मेहता और अजय जोशी आज सबा करीम और अंशुमन गायकवाड़ से मिले। उनके साथ उनके वकील, कानूनी सलाहकार गगनदीप अहलूवालिया थे। दो सदस्यीय दल ने अपने वकील के जरिये मान्यता कमेटी को यूटी क्रिकेट एसोसिएशन में अतीत में पनप चुके विवाद के बारे में अवगत कराया। उनका आरोप था कि उन्हें और एसोसिएशन के अन्य सदस्यों को इस बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया और ना ही बैठक से पहले उनके साथ कोई सलाह-मशविरा किया गया।
दल सदस्यों ने वर्तमान एसोसिएशन को अवैध ठहराने की कोशिश करते हुए दावा किया कि जो बैठक बुलाई गई वह कानूनी तौर पर मानी नहीं जा सकती, क्योंकि जो बॉयलाज बनाए गए हैं, उनका उल्लंघन करके यह बैठक बुलाई गई थी। दल के मुताबिक सब बाते सुनने के बाद मान्यता कमेटी ने सारी बातों को एक लिखित तौर पर ई-मेल के जरिये भेजने को कहा और यह भी बताया कि जो निर्णय लेना होगा वह बीसीसीआई के लोकपाल, सीओए और सीईओ की ओर से लिया जाएगा।
क्या कहते हैं यूटी एसोसिएशन के प्रधान
यूटी क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि ऐसे मौकों पर बेवजह समस्या पैदा की जा रही है। उनके मुताबिक जून 2016 से वह सर्वसमिति से अध्यक्ष चुने गए, किसी को हटाया नहीं गया। इसके बाद उनकी मान्यता की दिशा में बीसीसीआई से कम से कम 20 बार बैठक हुई। उन्होंने पूरे सिस्टम और प्रोपर चैनल से एसोसिएशन का संचालन किया और समय पर रिर्टन तक भरी। यहां तक कि वह खुद सीए हैं जिनका सवाल है कि शिकायत अगर थी तो पहले क्यों नहीं की गई। शहर जब मान्यता मिलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है ऐसे में अब इस मौके पर आकर क्यों सीधे जाकर शिकायत की गई ? हम से बातचीत जा सकती थी ।