पिछले दिनों वायरल हुए वीडियो मामले में जैन मुनि नयन सागर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उनसे उपाध्याय की पदवी छीन ली गई है। उनकी दीक्षा के पांच साल भी कम कर दिए गए हैं। अब उन्हें प्रायश्चित करना होगा। तीन माह तक वह मौन रहेंगे और गिरनार पर्वत की 22 वंदना करनी होंगी। वायरल वीडियो से जिन क्षेत्रों में बदनामी हुई है, उनमें तीन साल तक प्रवेश निषेध रहेगा।
यह सजा गुरु आचार्य निर्मल सागर ने सुनाई है। वह संघ के साथियों से मिल तो सकते हैं, लेकिन किसी से बात नहीं करेंगे। एक वर्ष में 24 प्रवास रूप में प्रायश्चित तप करने होंगे। कुछ समय पहले एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक युवती नयन सागर के कमरे से निकल रही थी। इस वीडियो के बाद खूब हंगामा हुआ। तब जैन मुनि नयन सागर का चंडीगढ़ में चातुर्मास चल रहा था।
गुरु आचार्य निर्मल सागर ने उन्हें चातुर्मास के बाद अपने पास गुजरात बुलाया था। मंगलवार को गुरु आचार्य निर्मल सागर ने गुजरात के जूनागढ़ में सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। आचार्य सुनील सागर महाराज, डॉ जयकुमार जैन, प्रोफेसर वर्षभ प्रसाद जैन वर्धा, जैन संतों और समाज के लोगों की मौजूदगी में आचार्य निर्मल सागर महाराज ने कहा कि यदि लड़की बयान दे या कोई ऐसा वीडियो सामने आए, जिसमें कुछ आपत्तिजनक हो, तो वह नयन सागर को कपड़े पहना देंगे।
इस निर्णय के दौरान मुजफ्फरनगर, खतौली, दिल्ली आदि स्थानों के जैन समाज के लोग भी मौजूद रहे।