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खौफनाक समस्या : पंजाब में घूम रहे 2.92 लाख लावारिस कुत्ते, अमृतसर में सुबह पैदल निकलना मुश्किल 

Sat, 13 Mar 2021 10:17 AM IST
निवेदिता वर्मा हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • पंजाब में घूमते 2.92 लाख लावारिस कुत्ते बने आम लोगों के लिए बहुत बड़ी समस्या 
  • दो वर्षों में कुत्तों के हमलों के प्रतिदिन 300 से ज्यादा केस आए सामने 
  • पंजाब विधानसभा की सरकारी आश्वासन संबंधी कमेटी ने अपनी 50वीं रिपोर्ट में किया खुलासा 
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stray dogs - फोटो : ANI
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विस्तार
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पंजाब की गलियों, सड़कों, हड्डा-रोड़ियों पर घूमते 2.92 लाख लावारिस कुत्ते आम लोगों के लिए बहुत बड़ी समस्या बन गए हैं। बीते दो वर्षों के दौरान इन लावारिस कुत्तों के हमलों के प्रतिदिन 300 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। 2020 के दौरान भी कुत्तों के काटने के 50 हजार से अधिक मामले सामने आए थे।
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पंजाब विधानसभा की सरकारी आश्वासन संबंधी कमेटी ने अपनी 50वीं रिपोर्ट में इस गंभीर संकट का खुलासा करते हुए स्थानीय सरकार विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग, वन विभाग, पशुपालन विभाग, सेहत विभाग और वित्त विभाग को साझा कार्यक्रम तैयार कर अगले छह माह में हल तलाशने की सिफारिश की है। 


विधायक इंदरबीर सिंह बुलारिया के नेतृत्व में गठित उक्त कमेटी ने राज्य सरकार के कुल 167 आश्वासनों की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इन्हीं के तहत कमेटी ने राज्य में लावारिस कुत्तों व पशुओं से पैदा हो रही समस्या का अध्ययन कर सरकार को छह महीने में इसका हल तलाशने को कहा है। 
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कमेटी की ओर से अपनी रिपोर्ट में कहा गया कि अध्ययन के दौरान, विधायक के तौर पर आम लोग भी उनसे लावारिस पशुओं की समस्या को लेकर सवाल पूछते रहे, लेकिन कमेटी के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं था। कमेटी ने माना कि इस मामले में पशुपालन विभाग और अन्य संबंधित विभागों में तालमेल का अभाव है, जबकि संबंधित विभागों को मिलजुल कर रणनीति तैयार करते हुए काम करना चाहिए।

पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने कमेटी को बताया कि लावारिस कुत्तों की संख्या 2.92 लाख है। एनिमल बर्थ कंट्रोल गाइडलाइंस के अनुसार 71 म्युनिसिपल कमेटियों और 10 नगर निगमों में नसबंदी के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं, लेकिन यह मुहिम बहुत कारगर नहीं है। अधिकारियों ने कुत्तों के काटने के मामलों की तादाद बढ़ने की बात भी स्वीकार की। कमेटी ने पाया कि लावारिस कुत्तों के आतंक के चलते अमृतसर शहर में लोग भोर में 3 बजे श्री दरबार साहिब, दुर्ग्याणा मंदिर और शहीदां गुरुद्वारा साहिब तक पैदल भी नहीं जा सकते।

पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव की ओर से मुख्यमंत्री को दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में कुत्तों के काटने के 1,12,431 और वर्ष 2018 में 1,13,637 मामले सामने आए। इनमें से क्रमश: 13,185 और 15,324 मामले अकेले लुधियाना जिले में दर्ज किए गए। इन दो वर्षों के दौरान राज्य में कुल 4.70 लाख कुत्तों की आबादी में से 3.05 लाख लावारिस कुत्ते थे।
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हल तलाशने को कैबिनेट सब-कमेटी भी गठित
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस समस्या का हल तलाशने के लिए वर्ष 2019 में पांच सदस्यीय कैबिनेट सब कमेटी का गठन भी किया था। पशुपालन मंत्री तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवा के नेतृत्व में गठित इस सब कमेटी में लोक निर्माण मंत्री विजय इंदर सिंगला, स्थानीय निकाय मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा, स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू, उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा सदस्य हैं।

इसके साथ विभिन्न विभागों के सचिव और तमाम जिलों के उपायुक्त भी जोड़े गए हैं। लेकिन इस मामले में सरकार की संवेदनशीलता की सच्चाई यह है कि इस सब कमेटी की अब तक सिर्फ एक ही बैठक हुई है। कमेटी के प्रमुख पशुपालन मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा का कहना है कि अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। 

उच्चस्तरीय कमेटी का भी गठन
मुख्यमंत्री ने 3 जुलाई, 2019 को लावारिस कुत्तों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कार्य दल का गठन किया था। कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर चर्चा के लिए बुलाई एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए, कैप्टन ने मुख्य सचिव को समस्या के उन्मूलन के लिए भारत सरकार से सहायता लेने की संभावना तलाशने के निर्देश भी दिए थे। 
 
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