हरियाणा में अब धान का सीजन लगभग खत्म हो चुका है और पराली जलाने के मामले भी कम हो चुके हैं। पराली से होने वाले प्रदूषण को लेकर इस सीजन भी काफी हो-हल्ला रहा। सुप्रीम कोर्ट ने भी हरियाणा के मुख्य सचिव को तलब कर प्रदूषण के संबंध में न केवल जवाब तलब किया, बल्कि कई बार तल्ख टिप्पणियां कर पंजाब, हरियाणा व दिल्ली को फटकार भी लगाई। इसी के चलते इस बार हरियाणा ने प्रदेश में काफी सख्ती दिखाई।
इसी के चलते प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों के खिलाफ मुकद्दमे दर्ज किए गए और उनकी गिरफ्तारियां तक भी हुई। सख्ती का नतीजा यह रहा कि पूरे प्रदेश में ओवरआलपराली जलाने केमामलों में पिछली वर्ष की अपेक्षाकृत कुछ हद तक कमी जरूर आई। लेकिन सूबे के सात जिलों रेवाड़ी, पानीपत, पंचकूला, फरीदाबाद, यमुनानगर, अंबाला और करनाल जिले ऐसे हैं, जहां पराली जलाने के केस पिछले साल से भी अधिक रिकार्ड किए गए हैं। इस बार पराली जलाने के मामलों की निगरानी जमीन और आसमान दोनों से हो रही थी।
जमीन पर कृषि विभाग के उप निदेशकों की निगरानी में टीमें जहां सूचना मिलने पर आधी रात को जलते खेतों में पहुंच कार्रवाई करने में जुटी थी, तो वहीं हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसक) सेटेलाइट के जरिए खेतों में बर्निंग प्वाइंट्स की सूचना कृषि और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजा जा रहा था। उधर, किसानों को भी इस बार पूरा आभास था कि सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ सरकार भी पराली जलाने के मामलों को लेकर गंभीर है। इसलिए इस बार इन केसों में कमी आई।
वर्ष 2018 में धान के पूरे सीजन (30 नवंबर तक) में पराली जलाने के 10286 केस रिकार्ड किए गए थे। लेकिन इस सीजन में 26 नवंबर 2019 तक इन केसों की संख्या 6623 है। यानि इस सीजन में पराली जलाने के 3663 मामले कम हुए हैं, जोकि 35.61 प्रतिशत है।
नूहं के एक भी खेत में नहीं जली पराली
पिछले सीजन और इस सीजन में पराली जलाने के मामलों की तुलना करें तो नूहं ऐसा जिला रहा, जहां इस बार पराली जलाने का एक भी केस नहीं आया, जबकि पिछली वर्ष 2018 में यहां दो केस पराली जलाने के पकड़े गए थे। इसी तरह पराली जलाने में पिछले साल अंबाला में 360 मामले थे, जबकि इस साल 373 मामले पकड़े गए। भिवानी में मामलों की संख्या 24 से घटकर 13 हुई, चरखीदादरी व महेंद्रगढ़ में पहले भी एक केस था और इस साल भी एक ही केस पकड़ा गया।
फरीदाबाद में संख्या 2 से बढ़कर 5 हुई, फतेहाबाद में संख्या 2926 से घटकर 1335 हुई, गुरुग्राम में पहले भी संख्या 3 थी और इस बार भी 3 ही रही, हिसार में संख्या 236 से घटकर 122 हुई, झज्जर में संख्या 31 से घटकर 10 हुई, जींद में संख्या 1001 से घटकर 610 हुई, कैथल में संख्या 1477 से घटकर 1252 हुई, करनाल में संख्या 958 से बढ़कर 1122 हुई, कुुरुक्षेत्र में संख्या 741 से घटकर 722 हुई, रोहतक में संख्या 55 से घटकर 21 हुई, पंचकूला में संख्या 16 से बढ़कर 20 हुई, पानीपत में संख्या बढ़कर 37 से 46 हुई, पलवल में संख्या घटकर 225 से 204 हुई, रेवाड़ी में संख्या बढ़कर 0 से 2 हुई, सिरसा में संख्या घटकर 1929 से 458 हुई, सोनीपत में संख्या घटकर 45 से 39 हुई और यमुनानगर में संख्या बढ़कर 216 से 264 हुई।
इस बार पराली जलाने के मामलों को लेकर हरियाणा सरकार बहुत ज्यादा गंभीर है। जागरूकता शिविरों जैसे अभियान चलाने से लेकर सख्ती तक की गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों व निर्देशें की पालना लगातार सरकार कर रही है और उसी गाइडलान के तहत बोर्ड भी अपने काम में जुटा हुआ था। हरसक व कृषि विभाग भी निरंतर अपने प्रयासों में जुटे रहे, इसी का नतीजा यह रहा कि ओवरआल मामले कम हुए है। कुछ जिले ऐसे हैं, जहां अभी और फोकस करना है। प्रदूषण के अन्य कारणों पर भी अब फोकस किया जाएगा। सरकार पराली प्रबंधन के लिए सीमांत किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दे रही है, अभी तक करोड़ों रुपये वितरित किए जा चुकेहैं, यह प्रदेश सरकार का सराहनीय कदम है।
- एस. नारायणन, सदस्य सचिव, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड