चंडीगढ़। अब कहानियों में रस नहीं है। गहराई कम हो गई है। एआई के बढ़ते उपयोग से लोग आलसी हो गए हैं। जब तक पढ़ेंगे नहीं तो लिख नहीं पाएंगे। पहले नानी दादी कहानी सुनाती थी। उससे बच्चों का दिमाग चलता था। कमरे में बैठे-बैठे कहानी नहीं रच सकते हैं। बच्चों को ट्रैवल कराना होगा। यह बात विज्ञापन जगत के दिग्गज प्रह्लाद कक्कड़ ने शनिवार को लेक क्लब में आयोजित सीएलएफ लिटराटी 2025 (चंडीगढ़ लिटफेस्ट) में कही। चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी (सीएलएस) की ओर से इसका आयोजन हो रहा है। यह इस आयोजन का 13वां संस्करण है।
प्रह्लाद कक्कड़ ने कहा कि अब चट मंगनी पट विवाह का चलन हो गया है। ऐसे स्टोरी तैयार नहीं होगी। कहानियां सुनानी पड़ेंगी। किसी न किसी को तो आगे आना ही होगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो रस से भरी कहानियां खत्म होने लगेगी। इससे साहित्य का बड़ा नुकसान है। बहुत बड़ा गैप बन जाएगा। अभी लोग तकनीक में घुसे हुए हैं। पढ़ेंगे तो गहराई से कहानियां लिखेंगे। उन्होंने कहा कि कहानी की दुनिया में आना पड़ेगा।
शनिवार को आयोजन के शुभारंभ के अलावा साहित्यिक सत्रों और पुस्तक विमोचन हुए। शुरुआत डॉ. सुमिता मिश्रा, फेस्टिवल डायरेक्टर एवं चेयरपर्सन (सीएलएस) के स्वागती भाषण से हुई, जिसके बाद राष्ट्रीय साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने उद्घाटन किया। इसके बाद संवाद शुरू हुए। डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि पुस्तक प्रेमियों की एक साधारण सी शुरुआत से सीएलएफ लिटराटी आज न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे भारत के सबसे बहुप्रतीक्षित साहित्यिक आयोजनों में से एक बन चुका है।
साहित्यिक चर्चाओं की शुरुआत द पावर ऑफ ए स्टोरी: एडवरटाइजिंग इनसाइट्स सत्र से हुई। विज्ञापन जगत के दिग्गज प्रह्लाद कक्कड़ से लेखिका अराधिका शर्मा ने संवाद किया। इंडियन डेमोक्रेसी: इवॉल्विंग पॉलिटी एंड पब्लिक डिस्कोर्स सत्र में पूर्व सांसद एवं लेखक शाहिद सिद्दीकी, लेखक राशिद किदवई और पुरस्कार विजेता पत्रकार नीरजा चौधरी ने अपनी बात रखी। उनके साथ वरिष्ठ पत्रकार रमेश विनायक से बातचीत की।
बांग्लादेश: द स्टोरी ऑफ एन अनफिनिश्ड रेवोल्यूशन’ सत्र में प्रसिद्ध लेखक दीप हलदर और लेखिका एवं शोधकर्ता रामी देसाई ने वरिष्ठ पत्रकार कार्तिकेय शर्मा से संवाद किया। इस दौरान दीप हलदर की पुस्तक इंशाल्लाह बांग्लादेश का भी विमोचन किया गया। बुक बज़ सत्र के अंतर्गत महक ग्रोवर की पुस्तक द साइलेंट ब्रेव और मंजू जैदका की पुस्तक द लीजेंड ऑफ सांझी-गिरी का विमोचन हुआ।
इसके बाद शब्द की सुगंध: हिंदी साहित्य का नया दौर सत्र आयोजित हुआ। जिसमें माधव कौशिक, चंद्रा त्रिखा एवं चंद्रशेखर वर्मा ने वरिष्ठ पत्रकार शायदा बानो के साथ संवाद किया। दिल दे कागज उत्ते: नवीं लहर दे कलमकार सत्र में प्रसिद्ध कवि बुब्बू तिर ने लेखक रावी पंधेर से बातचीत की।
चंडीगढ़: द सिटी दैट इज, एंड दैट वाजन्ट’ सत्र में पत्रकार विभोर मोहन और वास्तु इतिहासकार राजनीश वत्स ने लेखक राजीव लोचन से संवाद किया। डॉ. सुमिता मिश्रा ने शी राइट्स, शी लीड्स: स्टेटक्राफ्ट एंड स्टांजा सत्र में पत्रकार मनराज ग्रेवाल से बातचीत की, जबकि अनटेम्ड साइलेंसेज: द मैनी लाइव्स ऑफ संध्या मृदुल सत्र में अभिनेत्री व कवयित्री संध्या मृदुल ने लेखिका सोनिया चौहान से संवाद किया।