समिति ने मौजूदा सेक्टरों में भी स्टिल्ट प्लस चार मंजिला के निर्माण में अपनी सिफारिशें दी हैं। समिति का कहना है कि जिन सेक्टरों की सड़कें 12 मीटर चौड़ी और बुनियादी ढांचा बढ़ाने की गुंजाइश हो, वहां इसके निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। जिन सेक्टरों में स्टिल्ट प्लस चार मंजिला के निर्माण को रोक दिया गया था, उसके लिए समिति ने पानी की निकासी, पानी की आपूर्ति व अन्य बुनियादे ढांचे की क्षमता का ऑडिट कराने का सुझाव दिया है। ऑडिट रिपोर्ट सत्यापित होने के बाद मौजूदा क्षेत्रों में ऐसी मंजूरी देने के लिए उपायुक्तों को अधिकृत किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्टिल प्लस चार मंजिला एक स्वतंत्र इमारत होनी चाहिए। इसका पड़ोसियों की दीवार पर भार नहीं होना चाहिए। समिति ने स्टिल्ट पार्किंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्विक एक्शन टीम बनाने का भी सुझाव दिया है।
दीवारों के नुकसान पर प्लॉट मालिक से हो वसूली
रिपोर्ट के मुताबिक स्टिल्ट प्लस चार मंजिला के निर्माण से यदि पड़ोसी के मकानों को नुकसान पहुंचता है तो उसके लिए जिम्मेदार प्लॉट मालिकों से इसकी वसूली की जाए। यह राशि पीड़ित प्लॉट मालिकों को दी जानी चाहिए।
चार महीने में सैकड़ों लोगों की ली गई राय
हरियाणा सरकार के निर्देश पर पूर्व आईएएस राघवेंद्र राव के नेतृत्व में एक विशेषज्ञों की कमिटी गठित की गई थी। कमेटी ने चार महीने में पूरे प्रदेश के सैकड़ों लोगों से बातचीत। इसके अलावा कई एसोसिएशनों की भी इसमें राय शामिल की गई है। कमेटी ने इस संबंध में पंचकूला, गुड़गांव, फरीदाबाद व हिसार में जाकर लोगों के साथ मीटिंग की थी।