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स्टेम सेल से इलाज दिखाकर ठगी का धंधा

Wed, 09 Apr 2014 01:20 AM IST
आशीष वर्मा /अमर उजाला, चंडीगढ़
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स्टेम सेल से इलाज का रास्ता अभी दूर है। इलाज को मान्यता मिलने में वक्त लग सकता है, लेकिन चिकित्सा क्षेत्र की कुछ प्राइवेट कंपनियां स्टेम सेल से शर्तिया इलाज का सपना दिखाकर लोगों से लाखों रुपये लूट रही हैं। कंपनियां दावा कर रही हैं कि जन्म के वक्त यदि नवजात का अम्बिलिकल कार्ड (नाड़) उनके बैंक में जमा करवा दी जाए तो 20 साल तक  इस नाड़ से उनके बच्चे की जेनेटिक बीमारी दूर हो जाएगी।
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कार्ड को बैंक में सुरक्षित रखने के लिए साल भर के लिए 20 से 40 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। भारत में स्टेम सेल के लिए गाइडलाइंस तय करने के लिए गठित कमेटी के सदस्य व एम्स के रिसर्च विंग के डीन प्रोफेसर नरेंद्र कुमार मेहरा ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि ऐसी कंपनियां लोगों के इमोश्न से खेलकर अपना उल्लू सीधा कर रही हैं। कंपनियां लोगों को बताती है कि ऐश्वर्या राय ने अपने बच्चे का कार्ड बैंक में जमा कराया है, आप भी रखवा लो। मेट्रो सिटी में ऐसे बैंक धड़ल्ले से खुल रहे हैं।
इसलिए उठ रहे सवाल
1. क्या 20 साल तक कार्ड ब्लड को सुरक्षित रखा जा सकता है? कोई भी निगरानी कमेटी नहीं है।
2. क्या 20-25 साल तक प्राइवेट कंपनियां शहर में रहेंगी? इसकी क्या गारंटी हैं।
3. जब भी बच्चे को जेनेटिक बीमारी होगी तो उसके अंदर का ही एक सेल बीमारी देगा तो ऐसे में तो बच्चे में इंफेक्शन होगा।
4. अभी बोन मेरो (खून की बीमारी) का ही इलाज संभव हो सका, बाकी सभी का ट्रायल चल रहा है।

इसलिए कार्रवाई नहीं हो सकती
कार्ड ब्लड के कलेक्शन पर कार्रवाई नहीं करने पर प्रोफेसर मेहरा ने कहा कि अभी तो गाइडलाइंस तैयार हुई हैं। इसके बाद कानून तैयार होगा। जब कानून ही नहीं है तो कार्रवाई कैसे हो सकती है। उन्होंने बताया कि आईसीएमआर व डीबीटी से गाइडलाइंस मंजूर होने के बाद अब कानून मंत्रालय को इसे भेजा गया है। छह महीने के भीतर इसके लिए कानून भी बन जाएगा। उसके बाद ऐसे बैंकों पर कार्रवाई की जाएगी, जो लोगों को हर बीमारी में स्टेम सेल से इलाज की बात कह रहे हैं।
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मॉनिटरिंग के लिए बनी कमेटी
प्रोफेसर एनके मेहरा ने बताया कि स्टेम सेल के इलाज व बैंकिंग के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई। इसमें जिन बीमारियों के ट्रायल चल रहे हैं, उसको शामिल नहीं किया गया है। कार्ड टिश्यू और ब्लड की बैंकिंग के लिए भी सख्त गाइडलाइन जारी की है। साथ ही स्टेम सेल रिसर्च एंड थैरेपी गठित कर दी गई है, जो ऐसे मामलों की मॉनीटरिंग करेगी। इसके अलावा सभी इंस्टीट्यूट व अस्पतालों में एक कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। 
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