कैट ने गलत सिनियोरिटी लिस्ट के आधार पर प्रमोशन को मानते हुए पीजीआई के दो प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी की प्रमोशन पर रोक लगा दी। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) के डिपार्टमेंट ऑफ ऑब्सट्रेटिक्स एंड गायनोकोलॉजी में प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी (पीपीएस) के पद पर तैनात भूपिंदर सिंह और हरिंदर कौर की प्रमोशन को गलत सिनियोरिटी लिस्ट के आधार पर हुई प्रमोशन करार दिया है।
ट्रिब्यूनल ने पीपीएस पद को लेकर तैयार की गई सिनियोरिटी लिस्ट समेत डीपीसी प्रक्रिया और प्रमोशन आदेश को रद्द करने के आदेश दिए हैं। साथ ही आदेश दिया है कि सर्विस कैचअप रूल्स के तहत पीपीएस की दोबारा सिनियोरिटी लिस्ट तैयार की जाए। इसके तहत डीपीसी बनाकर रिव्यू करें और पीपीएस के पद पर पिछली तारीख से याचिकाकर्ता को प्रमोशन दें। ट्रिब्यूनल ने पीजीआई प्रबंधन को आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ता अगर फिट पाए जाते हैं तो उन्हें उक्त पद पर कंसीडर करें।
ट्रिब्यूनल ने संबंधित आदेश पीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ ऑब्सट्रैटिक्स एंड गायनोकोलॉजी में प्राइवेट सेक्रे टरी के तौर पर तैनात प्रेम चंद गुलेरिया की प्रमोशन संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं। ट्रिब्यूनल में दायर याचिका में गुलेरिया ने पीजीआई के डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर (प्रशासनिक), प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी भूपिंद्र सिंह और प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी हरिंदर कौर को पार्टी बनाया था।
गुलेरिया की ओर से केस की पैरवी कर रहे एडवोकेट एचएस सैनी के अनुसार याचिकाकर्ता सामान्य श्रेणी से पीजीआई में 1980 में बतौर जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर भर्ती हुए थे। वहीं, भूपिंदर सिंह और हरिंदर कौर इसी पद पर आरक्षित श्रेणी से 1989 में भर्ती हुए थे। गुलेरिया 1984 में सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर के तौर पर पदोन्नत हुए थे। वहीं, भूपिंदर और हरिंदर को ज्वाइनिंग के एक साल बाद 1990 में ही उक्त पद पर पदोन्नत कर दिया गया था।
गुलेरिया ने दोनों के प्रमोशन को ट्रिब्यूनल में चैलेंज किया था
कैट
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याचिका के अनुसार दोनों को गैरकानूनी और मनमाने तरीके से पदोन्नति दी गई थी। गुलेरिया के मुताबिक वह भूपिंदर सिंह और हरिंदर कौर से सीनियर थे। अगली प्रमोशन पर्सनल असिस्टेंट (पीए) की थी जिसे संस्थान ने कैडर रिव्यू व रिस्ट्रक्चरिंग कर प्राइवेट सेक्रेटरी (पीएस) कर दिया गया था। गुलेरिया अगस्त 1997 में पीएस के पद पर प्रमोट हुए थे। वहीं, भूपिंदर और हरिंदर कौर क्रमश: सितंबर 1998 और अक्तूबर 1998 में पीएस के पद पद प्रमोट हो गए। इस पद के लिए 8 वर्ष तक सीनियर स्केल स्टेनोग्राफर के पद पर अनुभव की बाध्यता थी।
डायरेक्टर से लगाई थी गुहार
एडवोकेट सैनी के मुताबिक गुलेरिया इन दोनों से सीनियर थे, लेकिन बावजूद इसके मई 2012 में जारी सिनियोरिटी लिस्ट में उन्हें 5वें नंबर पर रखा गया। वहीं भूपिंदर सिंह और हरिंदर कौर को लिस्ट में क्रमश पहले और दूसरे नंबर पर जगह दी गई। इस लिस्ट के आधार पर दोनों को गुलेरिया से सीनियर माना गया। उन्होंने इसका विरोध जताते हुए डायरेक्टर को अपनी रिप्रजेंटेशन दी, लेकिन उनकी कही कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद गुलेरिया की बजाय भूपिंदर सिंह और हरिंदर कौर को डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) के तहत दिसंबर 2013 में पदोन्नत कर प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी (पीपीएस) बना दिया गया। इसके बाद गुलेरिया ने सिन्योरिटी लिस्ट, डीपीसी प्रक्रिया और दोनों के प्रमोशन को ट्रिब्यूनल में चैलेंज कि या था।
पीजीआई का जवाब : मामले में पीजीआई की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया था कि याचिकाकर्ता गुलेरिया को भी डीपीसी में कंसीडर किया गया था, लेकिन भूपिंदर सिंह और हरिंदर कौर के अलावा सामान्य श्रेणी के 2 अन्य पीएस पदोन्नति के लिए फिट पाए गए थे। इसके बाद उक्त 4 लोगों को पदोन्नत कर पीपीएस बनाया गया था। गुलेरिया भूपिंदर सिंह और हरिंदर कौर से जूनियर थे। हालांकि इस बारे में पीजीआई दोनों के सीनियर होने संबंधी कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका था।
इस आधार पर ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय कैच-अप रुल्स और मामले के तथ्यों को जांचने के बाद सुनाए आदेश में कहा कि, ‘प्रमोशन को लेकर पीजीआई प्रशासन ने सही सिन्योरिटी लिस्ट नहीं बनाई थी। साथ ही गलत लिस्ट के आधार पर दो कर्मियों को पदोन्नत कर दिया गया। इसलिए उनकी प्रमोशन रद्द की जाती है। साथ ही फिर से सीनियोरिटी लिस्ट बनाकर प्रमोशन करने के आदेश दिए हैं। इसमें याचिकाकर्ता की प्रमोशन पर विचार करने को कहा है।