पंजाब में डिसिल्टिंग के नाम पर 32 स्थानों पर हो रहे खनन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण ने डीसिल्टिंग (एसईआईएए) पर अपने सात अक्टूबर के आदेश को वापस ले लिया। इसके चलते पूरे पंजाब में डिसिल्टिंग के स्थानों पर खनन पर रोक लग गई। पहले एसईआईएए ने डीसिल्टिंग पर रोक लगाई थी और बाद में आदेश वापस ले लिया था। आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई तो बाद में जारी आदेश वापस ले लिया जिससे रोक का आदेश प्रभावी हो गया।
अमृतसर के सहज प्रीत सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बताया कि एसईआईएए ने 17 फरवरी को पंजाब सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर बिना जिला सर्वे रिपोर्ट के डिसिल्टिंग के नाम पर हो रहे खनन पर रोक का आदेश जारी किया था। 26 अप्रैल को पंजाब सरकार ने एसईआईएए को आश्वासन दिया था कि छह महीनों में जिला सर्वे रिपोर्ट जमा करवा दी जाएगी। ऐसे में उन्हें खनन की इजाजत दी जाए। इस पर एसईआईएए ने सरकार को चार माह का समय दिया था।
28 सितंबर को एसईआईएए हर तरह के खनन पर रोक लगा दी थी। दो अक्तूबर को सरकार ने फिर आग्रह किया तो एसईआईएए ने सात अक्तूबर को सरकार के इस आग्रह को स्वीकार कर अपने आदेश पर 11 दिसंबर तक रोक लगाते हुए खनन की इजाजत दे दी थी। इसी आदेश को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
एसईआईएए ने हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया है कि वह अपने सात अक्तूबर के आदेश को वापस ले रहे हैं। इसके चलते डीसिल्टिंग के नाम पर 32 स्थानों पर चल रहे खनन पर रोक लग गई है। पंजाब के पठानकोट, गुरदासपुर व अमृतसर में रावी नदी के किनारे खनन पर हाईकोर्ट पहले ही रोक लगा चुका है। बिना जिला सर्वे रिपोर्ट के राज्य में खनन के ठेके जारी करने पर भी हाईकोर्ट की रोक प्रभावी है।