दशमलव के फेर में पीजीआई के एक्सटेंशन प्लान में देरी हो रही है। दरअसल, सारंगपुर में जमीन आवंटन के बदले पीजीआई को 3.15 करोड़ रुपये एस्टेट ऑफिस में जमा कराने थे, लेकिन दशमलव के बाद के अंकों में असमंजस के चलते पीजीआई ने एस्टेट आफिस में 24 लाख रुपये कम जमा करा दिए।
इसके चलते एस्टेट ऑफिस को सारंगपुर में पीजीआई प्रबंधन को जमीन हस्तांतरित करने में दिक्कत आ रही है। इस संबंध में एस्टेट आफिस ने अब पीजीआई को सूचित कर दिया है। पीजीआई द्वारा 24 लाख रुपये जमा कराने के बाद हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
पीजीआई विस्तार के तहत सारंगपुर में प्रशासन 50 एकड़ भूमि का आवंटन कर रहा है। प्रशासन इसके लिए पीजीआई से प्रति एकड़ 2.50 करोड़ रुपये ले रहा है। पीजीआई इसके लिए प्रशासन को कुल 130 करोड़ रुपये चुका रहा है। भूमि आवंटन के लिए एस्टेट ऑफिस के द्वारा 3.15 करोड़ रुपये की फीगर दी गई थी लेकिन दशमलव के फेर के चलते पीजीआई ने .15 को .10 समझकर 24 लाख रुपये कम जमा करा दिए।
एस्टेट ऑफिस जब निरीक्षण किया तो मामले का खुलासा हुआ। राशि कम जमा होने के कारण एस्टेट ऑफिस को भूमि हस्तांतरण में दिक्कत आ रही है। हालांकि एस्टेट ऑफिस के अधिकारियों का कहना है कि पीजीआई प्रबंधन को इसकी सूचना दे दी गई है। जल्द ही बकाया राशि जमा कर दी जाएगी। जिसके बाद भूमि आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
पहले फेज में मिलेगी 20 एकड़ जमीन
एस्टेट ऑफिस के अनुसार, पीजीआई प्रबंधन को पहले फेज में 20 एकड़ भूमि का आवंटन किया जाएगा। बता दें कि ओपीडी और ट्रामा सेंटर को यहां शिफ्ट किया जाएगा। पीजीआई का यह महत्वपूर्ण लंबे समय से अटका हुआ था।
एक्सपेंशन प्लान में खर्च होने हैं 1200 करोड़
सारंगपुर में पीजीआई के एक्सपेंशन प्लान पर लगभग 1200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पीजीआई ने जो प्लान तैयार किया है उसके अनुसार ओपीडी के निर्माण पर 300 करोड़ रुपये पहले फेज में खर्च करेगा। दूसरे फेज में ट्रामा और ओंकोलॉजी सेंटर पर 400 करोड़ और तीसरे फेज में लर्निंग एंड रिर्सोस सेंटर बनाया जाएगा। चौथे और अंतिम फेज में सारंगपुर में कन्वेंशन सेंटर बनाया जाएगा।
एडवाइजर ने निभाई अहम भूमिका
एडवाइजर मनोज परिदा के प्रयासों से ही पीजीआई विस्तार को गति मिल पाई है। पीजीआई प्रबंधन लगातार केंद्र सरकार के सामने जमीन के रेट को लेकर आ रही दिक्कत की बात रख रहा था। एडवाइजर मनोज परिदा की नियुक्ति के बाद प्राथमिकता के आधार पर यूटी प्रशासन ने पीजीआई के विस्तार को लेकर प्रयास शुरू किए थे। पूर्व में जमीन के लिए प्रति एकड़ 4 करोड़ रुपये का रेट तय हुआ था, लेकिन एडवाइजर के प्रयासों से यह रेट 2.50 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तय हो पाए थे।