चंडीगढ़। एडवाइजर मनोज परिदा की वैट ट्रिब्यूनल कोर्ट ने एक और अहम फैसला दिया है। एडवाइजर की वैट ट्रिब्यूनल ने एडिशनल कमिश्नर की कोर्ट को आदेश दिया कि विवाद की स्थिति में पार्टनर की भी अपील को सुना जाना चाहिए। इसके बाद कानूनी रूप से निर्णय दिया जाए। वैट कोर्ट ने यह आदेश सेक्टर 28 स्थित ब्रह्म स्वरूप पेट्रोल पंप के पार्टनर के सेक्टर 26 स्थित शोरूम को अटैच करने और उसकी अपील नहीं सुनने पर दिया है।
जानकारी के मुताबिक ब्रह्म स्वरूप संस के दो पाटर्नर थे, जिसमें एक ने करीब 92 लाख रुपये जमा करा दिए, लेकिन दूसरे पाटर्नर ने रकम जमा नहीं कराई। इस पर डिपार्टमेंट ने कार्रवाई करते हुए सेक्टर 26 में स्थित शोरूम को अटैच कर लिया था। इससे पहले डिपार्टमेंट ने कंपनी पर कार्रवाई करते हुए बैंक अकाउंट भी अटैच कर लिया है। इस मामले की सुनवाई एडिशनल एक्साइज कमिश्नर आरके पोपली की कोर्ट में चल रही थी। कोर्ट के निर्देश के खिलाफ दोबारा पार्टनर की ओर से अपील की गई थी। पोपली की कोर्ट ने सुनवाई करने से मना कर दिया। इसे लेकर पार्टनर ने एडवाइजर की वैट ट्रिब्यूनल कोर्ट में अपील की थी। एडवाइजर की कोर्ट ने इस पर एडिशनल कोर्ट को पार्टनर की अपील पर सुनवाई करने को कहा है।
यह था मामला
एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट ने वैट टैक्स में गड़बड़ी के चलते ब्रह्म स्वरूप संस को समन भेजा था। इसमें 1.85 करोड़ की डिमांड करते हुए डिपार्टमेंट में पेश होने को कहा गया था। टैक्स जमा कराने को लेकर डिपार्टमेंट और कंपनी मालिक के बीच कई बार मीटिंग हुई थी। इसमें कंपनी ने पहले 55 लाख रुपये जमा किए थे, जिसके बाद डिपार्टमेंट ने बैंक एकाउंट अटैच कर लिया था।