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PGI चंडीगढ़ के इतिहास में जिंदगी बचाने को अनोखा प्रयोग

Sat, 08 Aug 2015 01:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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वर्ल्ड आर्गन डोनर डे के मौके पर पीजीआई ने चंडीगढ़ के इतिहास में एक नया प्रयोग किया। आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए सेक्टर 32 मेडिकल कालेज से पीजीआई तक एक ग्रीन कारिडोर बनाया गया। इस पर एक एंबुलेंस दौड़ाई गई, जिसने आठ किलोमीटर के सफर को मात्र सात मिनट में तय किया।
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एंबुलेंस के भीतर ब्रेन डेड पेशेंट के आर्गन थे, जिन्हें जल्द से जल्द पीजीआई के ट्रामा आईसीयू में पहुंचाना था। चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस और पीजीआई के सटीक को-आर्डिनेशन की वजह से पहला प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा। दरअसल आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए शुक्रवार एक मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी।

इसका मकसद यह था कि यदि कोई ब्रेन डेड बॉडी या आर्गन पीजीआई तक पहुंचाना हो तो, उसके लिए कौन सा रास्ता उपयुक्त होगा और उस दूरी को तय करने में कितना समय लगेगा। भविष्य में यदि कोई आर्गन या ब्रेन डेड पेशेंट को पीजीआई तक पहुंचाना होगा तो इसी कॉरिडोर का इस्तेमाल किया जाएगा।
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इस रूट का किया गया इस्तेमाल

ट्रैफिक पुलिस के डीएसपी राजीव अंबस्ट ने बताया कि मेडिकल कालेज से पीजीआई जाने के लिए हमने उस रूट को चुना, जहां पर ट्रैफिक पुलिस का स्टाफ हर वक्त मौजूद रहता है।

ट्रैफिक पुलिस के स्टाफ को पहले से ही ब्रीफ कर दिया गया कि एंबुलेंस आए तो 30 सेंकेड के लिए ट्रैफिक को रोकना पड़ेगा। बारिश के बीच ट्रैफिक स्टाफ ने मोर्चा संभाला और मॉक ड्रिल को कामयाब बनाया।

चावला कर रहे थे मॉनीटर
मॉक ड्रिल को पीजीआई के डायरेक्टर वाईके चावला खुद मॉनीटर कर रहे थे। जब एंबुलेंस पीजीआई के एडवांस ट्रामा सेंटर में पहुंची तो डाक्टरों के साथ चावला भी मौजूद थे।

पीजीआई की ओर से बताया गया कि जल्द ही पीजीआई से चंडीगढ़ एयरपोर्ट और पटियाला मेडिकल कालेज से लेकर पीजीआई तक मॉक ड्र्रिल आयोजित करने का प्लान है।

जीएमसीएच-32 से डमी बॉडी लेकर एंबुलेंस निकली। वह गुरुद्वारा चौक और सेक्टर-७-2७ से मध्यमार्ग पर पहुंची। मध्यमार्ग से होकर एंबुलेंस पीजीआई पहुंची। एंबुलेंस ने कुल दूरी सिर्फ सात मिनट में तय की। वहां पहले से मौजूद स्टाफ ने बॉडी रिसीव की। 
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