साल 2015 में यूटी पुलिस की वर्दी पर कई दाग लगे। कोई रिश्वतखोरी में पकड़ा गया तो किसी पर गलत धाराएं लगाने के आरोप लगे। यही नहीं पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी भी आरोपों में घिरे रहे। पुलिस का बर्बर चेहरा भी जनता के सामने आया।
ये हैं 2015 के कुछ चर्चित मामले:
केस-1
कॉलोनी नंबर चार का हत्याकांड: पुलिस ने बरती लापरवाही
10 अप्रैल की रात को कॉलोनी नंबर चार से एक पौने चार साल की बच्ची का अपहरण हो गया। अगले दिन सुबह जंगल से शव मिला। बच्ची के साथ रेप के बाद हत्या की पुष्टि हुई। परिजनों और कॉलोनी के लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस सूचना के ढाई घंटे बाद पहुंची। बार-बार कहने के बावजूद पुलिस ने जंगल की तरफ सर्च नहीं की। इसके बाद डीआईजी ने थाना प्रभारी की कार्रवाई की जांच के आदेश दिए। हालांकि, पुलिस ने जांच में थाना प्रभारी को क्लीन चिट दे दिया।
केस-2
डीसी ऑफिस में मकान मांगने आए लोगों को दौड़ा-दौड़ा पीटा
सेक्टर-17 में 20 जून को डीसी ऑफिस मकान मांगने गए धनास निवासी महिलाओं और पुरुषों को पुलिस ने जमकर पीटा था। इस दौरान बच्चों को भी गंभीर चोटें आईं थीं। इसके बाद पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों पर केस दर्ज करके जेल भेजा था। पुलिस की इस बर्बरता से चारों ओर दहशत मच गई थी। पूरे शहर में कई दिनों तक यह घटना की चर्चा बनी रही।
केस-3
ट्रक ने आठ को लोगों को कुचला, धारा में फेरबदल
अगस्त 2015 को ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट पर लड़ाई की खुन्नस में एक ट्रक चालक से आठ लोगों को कुचल दिया था। इनमें से पांच की मौत हो गई थी। पुलिस ने पहले एक्सीडेंट की धारा दर्ज कर आरोपी गिरफ्तार कर लिया, लेकिन पुलिस की इस कार्रवाई के जबरदस्त विरोध के बाद पुलिस ने इसे गंभीर धारा में तब्दील किया।
केस-4
डीएसपी को चालीस लाख रुपये घूस लेते सीबीआई ने गिरफ्तार किया
साल 2015 में ऑर्थिक अपराध शाखा में तैनात डीएसपी आरसी मीणा को चालीस लाख रुपये घूस लेते सीबीआई ने गिरफ्तार किया। यह केस यूटी पुलिस की वर्दी पर सबसे बड़ा दाग था। जांच के दौरान यूटी पुलिस के आईजी और डीआईजी का नाम भी खूब उछला।