अप्रैल 2014 में स्टॉफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) की ओर से शहर के कुछ सरकारी स्कूलों में आयोजित टाइपिंग टेस्ट में दूसरे की जगह टेस्ट देते पकड़े कुल 28 आरोपियों को बुधवार को सीजेएम कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
बरी होने वालों में शिव प्रकाश, विक्रम सिंह, मंजीत उर्फ मंजू, पंकज, विनोद कुमार, सोनू, सुनील कुमार, अजीत कुमार, रवि कुमार, विपिन, सोनू, विनित पंवार, प्रदीप कुमार, आनंद कुमार, मिठ्ठू कुमार व अन्य शामिल हैं।
इनमें से प्रमोद कुमार भिवानी, अजीत कुमार और सुनील कुमार सोनीपत, अनिल कुमार पानीपत, सोनू दिल्ली सुल्तानपुरी, मंजीत, रवि कुमार और विपिन हिसार और जगमेश सिंह कैथल के हैं।
पुलिस सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप साबित करने में नाकाम रही। इनके खिलाफ सेक्टर-17 पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया था। 1 से 24 अप्रैल 2014 तक शहर के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-23 में एसएससी की ओर से टाइपिंग टेस्ट आयोजित किया गया था।
इस दौरान सेंटर के सुपरवाइजर को कुछ कैंडीडेट संदिग्ध लगे। उन्होंने जांच कराई तो पता चला कि कुछ कैंडीडेट दूसरे की जगह टाइपिंग का टेस्ट दे रहे हैं। इस पर सुपरवाइजर ने शिकायत पुलिस को दी।
सेक्टर-17 पुलिस थाने ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। कुल 24 दिनों में अलग-अलग दिन आयोजित परीक्षा के दौरान कुल 28 ऐसे कैंडीडेट पकड़े गए जो दूसरे की जगह परीक्षा दे रहे थे।
वहीं बचाव पक्ष के वकील के अनुसार अभियोजन पक्ष के गवाहों में से कोई भी आरोपियों को पहचान नहीं सका। इसके अलावा पुलिस किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रही।