बेअदबी की ताजा घटनाओं के बाद राज्य की चन्नी सरकार ने भले ही जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया है लेकिन इस मुद्दे पर कांग्रेस और सिखों में नई तकरार शुरू होने के आसार बनने लगे हैं। सोमवार को कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की ओर से अमृतसर व कपूरथला की घटना को लेकर किए ट्वीट में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने 1984 के दंगों में कांग्रेस की भूमिका याद दिला दी है।
सिंघवी ने ट्वीट किया- ‘बेअदबी भयानक है लेकिन एक सभ्य देश में लिंचिंग कम भयावह नहीं है। मैं अधिकारियों से उन सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूं जिन्होंने कानून अपने हाथ में लेकर इसे एक मिसाल के तौर पर पेश करने की कोशिश की।’ इसके जवाब में जत्थेदार हरप्रीत सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा- ‘हम आपको बताना चाहते हैं कि 1947 के बाद से सिख आचार संहिता, सिख धार्मिक स्थल, सिख इतिहास और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी पर, मनोवैज्ञानिक रूप से सिखों की भावनाओं को आहत किया गया है।
सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों को दंडित करने के बजाय, सरकारी आश्रय के तहत आरोपियों को बचाने के प्रयास किए गए थे, जिससे सिखों को चोट लगी है।’ उन्होंने लिखा- ‘अधिक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ऐसे हालात क्यों बने जहां संगत को उसे मारना पड़ा? जब कानून का शासन बेअदबी करने वालों को दंडित कर न्याय देने में विफल रहा है तो सिखों को क्या करना चाहिए? सिखों के उत्तराधिकारी न्याय के इंतजार में दुनिया छोड़कर चले गए हैं। 84 के नरसंहार के लिए और सिख अपने जीवन की अंतिम सांसें गिन रहे हैं, क्या करें?’