चंडीगढ़। शहर के गांवों में रहने वाले बच्चों और युवाओं को अब खेल सुविधाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। प्रशासन गांवों में खाली पड़ी जमीनों पर जरूरत के अनुसार स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करेगा। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने नगर निगम और खेल विभाग को गांवों में उपलब्ध खाली जमीनों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इन जमीनों पर खेल सुविधाएं विकसित करने के लिए नीति तैयार करने को कहा है।
प्रशासक ने मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद को एक माह के भीतर नीति तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। नीति तैयार होने के बाद इसे चंडीगढ़ के गांवों में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा तैयार करना है, ताकि बच्चों और युवाओं को प्रशिक्षण व अभ्यास के लिए शहर के दूर-दराज इलाकों में न जाना पड़े।
गांवों में उपलब्ध शामलात जमीनों के अलावा उन सरकारी जमीनों की भी पहचान की जाएगी जिन्हें पहले किसी योजना या सार्वजनिक उपयोग के लिए रखा गया था। नगर निगम और खेल विभाग जमीन के आकार, स्थान और उपयोगिता का आकलन करेंगे।
पंचायतों की जमीन भी विकल्प
चंडीगढ़ के गांवों में अब पंचायत व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पहले पंचायतों के लिए आरक्षित या इस्तेमाल होने वाली जमीनों को भी संभावित विकल्प माना जा रहा है। प्रशासक ने कहा कि मजबूत खेल ढांचे से स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। युवाओं को स्वस्थ गतिविधियों से जोड़ने और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।