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बेतुका तर्क देकर हजारों बेटियों के मोबाइल यूज पर लगाया बैन

Wed, 14 Oct 2015 03:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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नवरात्र में जहां एक ओर बेटियों को पूजा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के सबसे बड़े खेल संस्थान में बेटियों के मोबाइल यूज करने पर बैन लगा दिया गया है। मामला हरियाणा में हिसार का है। साई समेत तीन बड़े संस्थानों में सिर्फ बेटियों के मोबाइल रखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। तर्क यह दिया जा रहा है कि मोबाइल के प्रयोग से लड़कियां बिगड़ रही हैं।
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मोबाइल के प्रयोग से समय बर्बाद होता है। बेटियों का कहना है कि यह पाबंदी सिर्फ उन पर ही क्यों? क्या लड़कों का समय बर्बाद नहीं होता या वे बिगड़ते नहीं? यह निजी संस्थानों नहीं बल्कि सरकारी संस्थानों में हो रहा है। जिन तीन स्थानों पर प्रतिबंध लगाया गया है उसमें करीब 1500 से 2000 लड़कियां प्रभावित हो रही हैं।

महिला खिलाड़ियों से फोन लिए वापस
साई सेंटर में भी हॉस्टल में रहने वाली सभी लड़कियों से मोबाइल फोन ले लिए गए हैं। ये फोन उन लड़कियों को उनके अभिभावकों की उपस्थिति में ही वापस दिए जा रहे हैं। साथ ही फोन वापस देते समय अभिभावकों से लिखित में लिया जा रहा है कि वे यह फोन दोबारा अपनी लड़की को नहीं देंगे और वे इस फोन को अपने साथ लेकर जा रहे हैं।
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यहां फरमान जारी करने वाले अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल होने से लड़कियों रात भर चैटिंग करती हैं जिससे उनका समय बर्बाद होता है। वह खेल के लिए समय नहीं दे पाती। लड़कों से फोन वापस नहीं लिए गए हैं।
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छात्राएं नहीं रख सकती एंड्रॉयड फोन

फतेहचंद गर्ल्स कॉलेज के हॉस्टल में छात्राएं अपने पास एंड्रॉयड फोन नहीं रख सकती। छात्राओं को अपने पास साधारण फोन भी उस स्थिति में रखने दिया जाता है, जब वे अपने अभिभावकों की तरफ से दिया गया परमिशन लेटर कॉलेज को देती हैं। कई अभिभावक अपनी बेटियों को एंड्रॉयड फोन भी रखने देने के लिए मना नहीं करते।

मगर कॉलेज के नियमों के चलते छात्राएं एंड्रॉयड फोन नहीं रख पातीं। यहां पर भी कॉलेज का यही कहना है कि छात्राएं फोन का मिस यूज ज्यादा करती हैं। इस कारण कॉलेज प्रबंधन ने प्रतिबंध लगाया है।

छात्राओं को फोन पर बातचीत करने की मनाही
गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज में छात्राओं को फोन रखने से तो मनाही नहीं है। मगर कॉलेज टाइम के दौरान फोन पर बात करने से उन्हें जरूर रोका-टोका जाता है। कॉलेज की इस तरह की पाबंदी से छात्राओं में काफी नाराजगी भी है।

कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्राएं फोन पर अपना वक्त व पैसा दोनों बर्बाद करती हैं। यहां कॉलेज कैंपस में फोन करते दिखने पर डांट भी पड़ती है। छात्राओं के फोन को यहां बड़ा अपराध माना जा रहा है। अगर किसी के पास मोबाइल दिखा तो उसे दंड मिलना भी तय है।
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ये बेतुके तर्क दिए जा रहे हैं

लड़कियां देर रात तक फोन का इस्तेमाल करती हैं, जिसके कारण वे समय पर सोती नहीं। वैसे उन्हें अगर अपने अभिभावकों से बात करनी हैं, तो हॉस्टल में फोन उपलब्ध है। लड़कियां उस फोन का इस्तेमाल कर सकती हैं।
- सतीश कुमार सरहदी, डिप्टी डायरेक्टर, साई सेंटर हिसार

एंड्रॉयड फोन पर छात्राएं देर रात तक व्हाट्स एप आदि एप्लीकेशन पर बेवजह चैट करती हैं। यह नियम कॉलेज की प्रबंधक कमेटी ने ही बनाया हुआ है। वैसे अगर पेरेंट्स कहते हैं, तो हम छात्राओं को सिंपल फोन रखने की अनुमति दे देते हैं।
- निशा भाटिया, प्रिंसिपल, एफसी गर्ल्स कॉलेज

लड़का हो या लड़की किसी की भी आजादी छीनना पूरी तरह से गलत है। मोबाइल आज के समय में जरूरत बन चुका है। घर से दूर आने वाली लड़कियां मोबाइल के जरिए ही अपने परिजनों से संपर्क में रहती हैं। मोबाइल के कुछ साइड इफेक्ट भी हैं पर यह मतलब नहीं कि मोबाइल छीन लें। लड़कियों व लड़कों दोनों को मोबाइल के दुरुपयोग के प्रति जागरूक करना चाहिए।
- सरोज सैनी , सचिव, जनवादी महिला समिति, हिसार
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