कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों...यह पंतियां भीख मांगकर गुजारा करने वाले विकलांग राजू पर सटीक बैठती हैं। शारीरिक अक्षमता के बावजूद उसके अंदर समाज सेवा का जज्बा है।
अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि उसने भीख मांगकर जुटाई गई रकम से शहर की एक बदहाल सड़क की मरम्मत करने की पहल कर सरकार और समाजसेवी संस्थाओं को आइना दिखाने का काम किया है। शहर के ढांगू रोड पर बने गड्ढे हादसों का सबब बन चुके थे। सोमवार को इस सड़क की मरम्मत करवाने में जुटे राजू ने कहा कि उसे जनहित के कार्यों से खुशी मिलती है।
उसकी इस पहल से शायद शहर के समक्ष लोगों व सरकार को नसीहत मिलेगी। बचपन में पोलियो के कारण 35 वर्षीय राजू आज अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता। शारीरिक लाचारी के कारण ही वह आज बेरोजगार है। ऐसे में आय के लिए उसे शहर के बाजारों में भीख मांगनी पड़ती है।
फिर भी ईश्वर से उसे कोई शिकायत नही है। उसे शौक है तो बस समाज सेवा करने की। दूसरों के लिए कुछ करना उसे बेहद पसंद है। अब तक कई निर्धन परिवारों की कन्याओं का विवाह तक करा चुके राजू अब नए तरीके से समाज सेवा करना चाहता है। उसे यह कत्तई स्वीकार नहीं कि कोई सड़क दुर्घटना के कारण उसकी तरह अपंग हो।
सोमवार को चंद मजदूरों के साथ ढांगू रोड की मरम्मत करने में जुटे राजू ने बताया कि यह सड़क लंबे समय से टूटी पड़ी है। सड़क पर बने गड्ढे हादसों का सबब बने हुए हैं। वह चाहता है कि उसके साथ शहर के सक्षम लोग भी आगे आएं और दुर्घटनाओं को दावत देने वाली बदहाल सड़कों की मरम्मत में उसका सहयोग करें।