देश की अदालतों को तारीख पर तारीख के लिए कोसा जाता है, लेकिन इसके लिए जज ही जिम्मेदार नहीं होते। व्यवस्था भी इसके लिए बराबर जिम्मेदार है। दूसरी तरफ जानबूझ कर मामलों को लटकाने की प्रवृत्ति वाले लोग भी जिम्मेदार हैं।
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत के दौरान न्याय पालिका और समाज के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि लोग एक के बाद एक याचिकाएं लगातार दाखिल करते चले जाते हैं। नतीजा यह होता है कि प्रति जज केस की संख्या बढ़ जाती है।
ऐसे में जानबूझ कर केस को लटकाने की प्रवृत्ति सोने पर सुहागा का काम करती है। नतीजा यह होता है कि केस सालों साल लंबित रहते हैं। जस्टिस सूर्यकांत लंबे समय से ट्रैफिक से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहें हैं।
उन्हीं के प्रयासों का नतीजा है कि सड़क पर हालात बेहतर हुए हैं। सड़क सुरक्षा पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करें और सड़क पर संयम बरतें तो आधे से ज्यादा हादसे कम हो जाएंगे।
कानून चालान काटकर राजकोष भरने के लिए नहीं
धुंध के कारण लगातार हाईवे पर होती दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कहा कि कानून चालान काटकर राजकोष भरने के लिए नहीं बल्कि सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए है। केवल सरकार की जिम्मेदारी तय कर देने से सड़क पर सुरक्षा नहीं बढ़ेगी इसके लिए प्रत्येक वाहन सवार को कर्तव्यों की पालना करने का निश्चय करना होगा।