फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विधानसभा के विशेष सत्र में कांग्रेस-अकालियों में तीखी नोकझोंक, फिर नहीं पहुंचे सिद्धू

Tue, 26 Nov 2019 11:49 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
पंजाब विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

संविधान दिवस के मौके पर मंगलवार को बुलाए गए पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान भी कांग्रेस और अकाली दल के सदस्यों के बीच नोकझोंक जारी रही। दोनों ओर से सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए संविधान निर्माण से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए विरोधी पक्ष पर सियासी वार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। स्पीकर की हिदायत के बावजूद सदन में दोनों पक्षों के सदस्य एक-दूसरे पर टीका-टिप्पणी करते रहे।

विज्ञापन


भारत के संविधान और डा. बाबा साहेब आंबेडकर के बहुमूल्य योगदान पर सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस के सदस्य चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि डा. आंबेडकर सिख बनना चाहते थे लेकिन अकालियों ने उन्हें सिख धर्म में शामिल नहीं होने दिया। इस पर सभी अकाली सदस्यों ने कड़ा ऐतराज जताया। परमिंदर सिंह ढींढसा ने स्पीकर से शिकायत की कि चन्नी झूठ बोल रहे हैं और सदन में गलतबयानी कर रहे हैं। इस पर चन्नी ने कहा कि उनके पास इस बारे में ऐतिहासिक दस्तावेज हैं। 

इसके बाद चन्नी ने धर्मनिरपेक्षता का जिक्र करते हुए अकाली-भाजपा गठबंधन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संविधान में सरकारों से लिए स्पष्ट किया गया है कि वे किसी धर्म का पक्ष न लें और सभी धर्मों का सम्मान करें। संविधान निर्माता सभा में भी हिंदुओं का बहुमत था लेकिन उन्होंने भी धर्मनिरपेक्षता की हिमायत की। लेकिन मौजूदा सरकार हिंदुत्व की टॉफी पर राष्ट्रवाद की चॉकलेट चढ़ाकर परोस रही है जो पूरे देश को बांटकर रख देगी। इससे देश और संविधान को नुकसान होगा। चन्नी जब ये बातें कह रहे थे, तब सदन में अकाली सदस्य उन्हें लगातार टोकते रहे।

विज्ञापन

अनुच्छेद 370 पर अकालियों ने लिया यू-टर्न : चन्नी 

चरणजीत सिंह चन्नी ने अनुच्छेद 370 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिरोमणि अकाली दल हमेशा राज्यों के अधिक अधिकारों की मांग करते रहे लेकिन 370 पर यू-टर्न ले लिया। चन्नी ने आरोप लगाया कि कश्मीर के मामले में अकालियों को राज्यों के अधिकार याद नहीं आए। 

इस पर बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि कांग्रेस 370 और जम्मू-कश्मीर पर अपना स्टैंड स्पष्ट करे। उन्होंने कहा कि धारा 25 का बादल ने विरोध किया था। कुछ देर इसी बात पर शोरगुल होता रहा और स्पीकर ने सभी सदस्यों को मर्यादा बनाने रखने की ताकीद की। फिर भी चन्नी नहीं रुके और उन्होंने सदन को बताया कि अकालियों खासकर प्रकाश सिंह बादल ने 24 फरवरी, 1984 को संविधान की प्रतियां फाड़कर संविधान का अपमान किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली हमेशा संविधान के खिलाफ चले और संशोधनों व अधिक अधिकारों की मांग करते रहे हैं।

इससे पहले, विशेष सत्र के लिए विधानसभा की कार्यविधि और कार्य संचालन नियमावली के कुछ नियमों को स्थगित कर प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और कोई अन्य कामकाज पर रोक लगाने संबंधी प्रस्ताव लाया गया तो अकाली सदस्यों ने ऐतराज करते हुए कहा कि सदन संविधान पर चर्चा करने के लिए एकजुट हुआ है और सदन के कामकाज पर रोक संविधान की भावना का उल्लंघन है। पवन कुमार टीनू ने कहा कि संविधान की मूल भावना लोकतांत्रिक है। ऐसे में केवल एक दिवस मनाकर, प्रसाद बांटकर ही न चले जाएं।

मनप्रीत ने 1976 इमरजेंसी को सही ठहराया तो भड़के अकाली :

सदन में वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने संविधान दिवस के मौके पर अपने भाषण में 1976 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी को सही करार देते हुए कहा कि उस समय कुछ ताकतें देश के खिलाफ थीं और भारत की अर्थव्यवस्था को तहस नहस करना चाहती थीं।

इस पर अकाली दल के परमिंदर ढींढसा ने आपत्ति जताते हुए स्पीकर से कहा कि वित्त मंत्री इमरजेंसी को सही ठहरा रहे हैं, जबकि इमरजेंसी ने संविधान में निहित सभी नागरिक अधिकार छीन लिए थे। तब, मनप्रीत बादल ने कहा कि वह विस्तार से इसका खुलासा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मंशा तो महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति पर भी बहुत कुछ कहने की है। तब स्पीकर ने दोनों को शांत कराया।

विशेष सत्र में नहीं आए कैप्टन, बादल और सिद्धू :
संविधान दिवस मनाने के लिए मंगलवार को बुलाए गए पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री और सदन के नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह अनुपस्थित रहे। हालांकि उनके कल रात विदेश दौरे से लौट आने की जानकारी मिली है। कैप्टन के अलावा अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी सदन में दिखाई नहीं दिए। वहीं, कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू, जोकि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में बुलाए विशेष सत्र से भी गैरहाजिर रहे थे, मंगलवार को भी सदन में नहीं पहुंचे।

विधानसभा में डा. आंबेडकर की प्रतिमा लगाने की मांग
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सदस्यों ने विधानसभा में डा. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की। इस पर विधानसभा स्पीकर राणा केपी सिंह ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि इस संबंध में सदन के नेता से विचार विमर्श के बाद जल्द फैसला लिया जाएगा।

भारत के संविधान और डा. बाबा साहेब आंबेडकर के बहुमूल्य योगदान पर सदन में चर्चा की शुरुआत आम आदमी पार्टी की सदस्य सर्वजीत कौर माणुके ने की और उन्होंने संविधान के अनुसार दलितों व पिछड़ों के लिए आरक्षण व्यवस्था को जारी रखने पर जोर दिया। 
विज्ञापन

तकनीकी शिक्षा मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने सदन में एलान किया कि पंजाब के सभी तकनीकी शिक्षा संस्थायों में बाबा साहिब की फोटो सम्मान सहित लगाई जाएगी। अकाली दल के परमिंदर ढींढसा ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि संविधान एक किताब बनकर रह गया है, जबकि यह एक मुकम्मल संविधान है।

उन्होंने कहा कि अफसोस की बात है कि संविधान जिस मंशा से बना, वह पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि यह आत्ममंथन का दिन है क्योंकि संविधान से जो अधिकार मिले, क्या वह लागू किए गए?  उन्होंने कहा कि डा. आंबेडकर ने भी कहा था कि अगर संविधान को ऐसे लागू होना था तो मैं इसे पहले ही फाड़ देता। 

आम आदमी पार्टी के कुलतार सिंह संधवा ने चर्चा के दौरान कहा कि आज देश के संविधान को कदम-कदम पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संविधान को कमजोर किया जा रहा है। महाराष्ट्र में जो इस समय हो रहा है, सबके सामने है। राज्यपाल की कुर्सी का दुरुपयोग हो रहा है। संधवां ने राज्यपाल दफ्तर (व्यवस्था) को खत्म करने की मांग उठाई। इस चर्चा में मनप्रीत सिंह बादल, अकाली दल के पवन कुमार टीनू, सुखविंदर कुमार, चंदूमाजरा, आप के प्रिंसिपल बुधराम, कंवर संधू, कांग्रेस के राजकुमार वेरका व अन्य सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।

संविधान के तहत मौलिक कर्तव्यों बारे में विधानसभा ने सर्वसम्मति से लिया संकल्प
भारतीय संविधान की 70वीं वर्षगाँठ पर पंजाब सरकार ने संविधान के महत्वपूर्ण ढांचे ‘मौलिक कर्तव्यों’ के बारे में जागरूकता संबंधी एक राज्य स्तरीय मुहिम चलाने का फैसला किया है। इस संबंध में अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंगलवार को पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से संकल्प लिया। यह जागरूकता मुहिम आज से शुरू होकर डा. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जन्म वर्षगाँठ के मौके पर 14 अप्रैल, 2020 में ‘समरसता दिवस’ के मौके पर समाप्त होगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें