इरादे अगर मजबूत हों और प्यार गहरा तो रास्ते में तमाम तकलीफ आए फिर भी कोई परेशानी नहीं आती। इन लाइनों को सच कर रही हैं गगनदीप कौर और तरुण सखूजा की कहानी। मेजर थैलेसीमिया के मरीज होने के बावजूद इस दंपती ने एक दूसरे का हाथ थाम कर प्यार की मिसाल को कायम करते हुए लोगों को संदेश दिया है कि प्यार और जज्बा साथ हो तो थैलेसीमिया जैसी बीमारी के साथ भी एक खुशहाल जिंदगी जी जा सकती है।
चंडीगढ़ थैलेसिमिक चैरिटेबल ट्रस्ट के अंतर्गत पंजीकृत गगनदीप और तरुण पिछले 30 वर्षों से पीजीआई में इलाज कराने आ रहे हैं। मूलत: हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब निवासी यह दंपती खुद की जिंदगी को रफ्तार देने के साथ ही अपने परिवार को भी साथ लेकर चल रहा है। गगनदीप जहां एक शिक्षिका हैं, वहीं तरुण का खुद का बिजनेस है। वे माता-पिता के साथ पांवटा साहिब में रहते हैं। तरुण ने बताया कि पीजीआई में जब बचपन में इलाज कराने जाते थे तब वे गगनदीप कौर को कई बार देख चुके थे। गगनदीप दो चोटियां कर हंसते हुए वहां आती थी। उनकी सकारात्मकता ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया। वही गगनदीप का कहना है कि पीजीआई के माध्यम से मुझे तरुण जैसा जीवनसाथी मिला है जो हर कदम पर मेरा साथ दे रहा है।
गगनदीप बोली-तनाव हो तो करती हूं डांस
गगनदीप का कहना है कि वैसे तो उन्हें कभी तनाव होता नहीं, क्योंकि खुद को तनाव लेने के लिए खाली नहीं छोड़तीं। लेकिन जब कभी मन निराश होता है वह पंजाबी गाने बजा कर खूब डांस करती हैं। वही तरुण अपने तनाव को दूर करने के लिए कॉमेडी का सहारा लेते हैं। इनका मानना है कि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। इसलिए ईश्वर ने हमें जैसा भी बनाया है उसे स्वीकार करते हुए खुशियां बांटने का प्रयास किया जाना चाहिए।
यहां 443 थैलेसीमिक को मिल रहा चिकित्सा उपचार
314 बच्चे - पीजीआईएमईआर
129 बच्चे - जीएमसीएच-32
443 मरीजों का राज्यवार ब्यौरा इस प्रकार है
चंडीगढ़- 82 बच्चे
पंजाब - 185 बच्चे
हरियाणा -121 बच्चे
अन्य -55 बच्चे
विवाहित रोगियों की संख्या
कुल विवाहित थैलेसीमिया 43
- सामान्य साथी होना 23
- बच्चे वाले जोड़े 14
- सबसे बुजुर्ग विवाहित रोगी की आयु 48 वर्ष है
चंडीगढ़ में कम हो रहा बीमारी का प्रकोप
चंडीगढ़ में संक्रमित बच्चे के जन्म का आंकड़ा सितंबर 2019 से 2022 तक शून्य पर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाले हाई परफॉरमेंस लिक्विड कोमैटोग्राफी (एचपीएलसी) टेस्ट से इसकी स्क्रीनिंग की जा सकती है। ट्राइसिटी में यह टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। इसकी सुविधा पीजीआई में उपलब्ध है।
ये लक्षण हैं सामान्य
पीलिया, पीली त्वचा, नींद न आना, थकान, छाती में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, तेज धड़कन, विकास में बाधा, बेहोशी, संक्रमण का अधिक खतरा थैलेसीमिक होने के सामान्य लक्षण हैं।
पंजीकृत बच्चों को मिल रहा मुफ्त इलाज
थैलेसीमिक चैरिटेबल ट्रस्ट ऐसे मरीजों के लिए 1985 से नियमित रक्तदान शिविर आयोजित कर रहा है। वर्तमान में पीजीआई और जीएमसीएच-32 में दो दिवसीय देखभाल केंद्रों में 450 थैलेसीमिक बच्चे पंजीकृत हैं, जिनका इलाज हो रहा है। सभी रोगियों को खून चढ़ाने के लिए मुफ्त चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराई जाती है और गरीब रोगियों को निशुल्क दवाएं भी दी जाती हैं।
क्या है मर्ज, आप भी जान लें
- थैलेसीमिया रोग एक तरह का रक्त विकार है। इसमें बच्चे के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण सही ढंग से नहीं हो पाता है। इन कोशिकाओं की आयु भी बहुत कम हो जाती है। इस कारण इन बच्चों को हर 21 दिन बाद कम से कम एक यूनिट रक्त की जरूरत होती है।
- थैलेसीमिया एक वंशानुगत रोग है। अगर माता या पिता किसी एक में या दोनों में थैलेसीमिया के लक्षण हैं तो यह रोग बच्चे में जा सकता है इसलिए बेहतर होता है कि बच्चा प्लान करने या शादी से पहले ही अपने जरूरी मेडिकल टेस्ट करा लेने चाहिए।
- माता-पिता दोनों को ही यह रोग है लेकिन दोनों में माइल्ड (कम घातक) है तो बच्चे को थैलेसीमिया होने की आशंका बहुत अधिक होती है। साथ ही बच्चे में यह रोग गंभीर स्थिति में हो सकता है, जबकि माता-पिता में रोग की गंभीर स्थिति नहीं होती है।
- माता-पिता दोनों में से किसी एक को यह रोग है और माइल्ड है तो आमतौर पर बच्चों में यह रोग ट्रांसफर नहीं होता है। यदि हो भी जाता है तो बच्चा अपना जीवन लगभग सामान्य तरीके से जी पाता है। कई बार तो उसे जीवन भर पता ही नहीं चलता कि उसके शरीर में कोई दिक्कत भी है।
आंकड़े बयां कर रहे बदलाव की बयार
2016 से 19 के बीच ट्राइसिटी में पांच थैलेसीमिक बच्चों ने जन्म लिया था। इसमें से तीन बच्चे पंचकूला, एक मोहाली और एक चंडीगढ़ का है। चंडीगढ़ में पंजीकृत बच्चे का जन्म 2019 में हुआ था, जबकि मोहाली में 2018 और पंचकूला में 2019 में दो व 2020 में एक बच्चे ने जन्म लिया था।
2019 से 2022 सितंबर के बीच ट्रस्ट में पांच बच्चों को पंजीकृत किया गया है। उनमें से एक बच्चा चंडीगढ़ और मोहाली व पंचकूला के दो-दो हैं। चंडीगढ़ वाले बच्चे की जन्मतिथि 2019, पंचकूला के क्रमश: 2020 और 2021 व मोहाली के क्रमश: 2020 व 2021 है। जबकि 2022- 23 में अब तक थीं बच्चे पंजीकृत हुए हैं।
कोट-
थैलेसीमिया को समाप्त करने के लिए ट्रस्ट के सदस्य 38 साल से लगातार प्रयास कर रहे हैं। मैं 35 वर्षों से इससे जुड़कर काम कर रहा हूं। मेरी प्रत्येक युवा से अपील है कि वे शादी से पहले मेडिकल कुंडली जरूर मिलवाए, क्योंकि जानकारी के बल पर ही इस मर्ज को और ज्यादा फैलने से रोका जा सकता है। - राजिंदर कालरा, सदस्य सचिव, थैलेसीमिक चैरिटेबल ट्रस्ट, चंडीगढ़