बैठक में आप पार्षद तरुणा मेहता ने कहा कि हमने या हमारी पार्टी ने कभी नहीं कहा कि चंडीगढ़ से यूटी का दर्जा छीन लिया जाए लेकिन चंडीगढ़ के विकास की बात आती है तो सदन में बताया जाता है कि प्रशासन के प्रस्ताव को पलटा नहीं जा सकता है, यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है, फिर यह राजनीतिक एजेंडा, जिसका अधिकार हमारे पास नहीं हैं, उसे क्यों लाया गया है।
कांग्रेस पार्षद गुरुबक्श रावत ने कहा कि इस तरह का प्रस्ताव लाना अच्छा है लेकिन इसमें लोगों से सुझाव मांगे जाते तो और बेहतर होता। आम लोगों के घरों में चोरी हो जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन कोई अधिकारी या नेता आ जाए तो उनकी सुरक्षा में पूरी फोर्स तैनात हो जाती है। वीआईपी लोगों की सुरक्षा के चक्कर में शहर के लोगों का अधिकार मारा जाता है। शहर की सड़कों पर गड्ढे होते हैं तो पंजाब और हरियाणा से फंड नहीं आता। हम शहर के विकास के एजेंडों को लेकर ऐसे ही विशेष बैठक बुलाएंगे तो बेहतर होगा।
एक बार फिर सदन में पोस्टर वार, आप व भाजपा पार्षदों में नोकझोंक
सदन में एक बार फिर आम आदमी पार्टी ने पानी के दामों को लेकर पोस्टर लहराना शुरू किया तो भाजपा पार्षदों ने भी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम लिखे पर्चे दिखाने शुरू कर दिए। इस बीच आप पार्षद दमनप्रीत बादल मेयर की टेबल पर हाथ रखकर कुछ दस्तावेज दिखाने लगे तो भाजपा पार्षद जसमनप्रीत ने उनका हाथ हटाकर पीछे कर दिया, इस बात को लेकर दोनों में काफी नोकझोंक हुई। अन्य पार्षदों ने बीचबचाव कर दोनों को हटाया।
सांसद बीमार तो वर्चुअल जुड़तीं, सदन की भावनाओं को कौन संसद में रखेगा: रावत
कांग्रेस पार्षद गुरुबक्श रावत ने कहा कि सांसद किरण खेर बीमार हैं इसलिए सदन में आने में असमर्थ हैं लेकिन वह वर्चुअल तरीके से सदन में जुड़तीं तो शायद पार्षदों की भावनाएं जान पातीं। जनप्रतिनिधियों की बात को लोकसभा तक पहुंचाने का माध्यम सांसद ही हैं। ऐसे में यहां जिन मुद्दों को लेकर चर्चा हुई, उसे लोकसभा में रखना भी जरूरी है।
तीनों जगहों से आ गया प्रस्ताव, संसद करेगी निर्णय: सत्यपाल जैन
पूर्व सांसद सत्यपाल जैन का कहना है कि चंडीगढ़ को लेकर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ तीनों के मत अलग-अलग हैं और तीनों प्रमुख पार्टियों के प्रदेश प्रभारियों के मतों में भी भिन्नता है। इस मुद्दे पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ तीनों ने अपने प्रस्ताव दे दिए हैं। किसी भी राज्य की सीमा में बदलाव देश की संसद का विषय है। इसके लिए संविधान में संशोधन करना होता है। यह दो राज्यों में अंतरराज्यीय विवाद है। इसे आपसी सुलह से हल करना ही बेहतर रास्ता है। एक बार चंडीगढ़ इस विवाद को झेल चुका है, इसलिए दोबारा यह स्थिति नहीं बननी चाहिए।
एक तिहाई पार्षद पास कर सकते हैं एजेंडा: आयुक्त
सदन में पार्षदों की ओर से हंगामा होने के बाद आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा कि सदन में उपस्थित पार्षदों में से एक तिहाई ने समर्थन कर दिया तो एजेंडा पास हो जाएगा। आप और कांग्रेस ने विकास कार्यों पर चर्चा न होने पर वॉकआउट कर दिया, वहीं अकाली दल के पार्षद ने भी बात न सुने जाने पर वॉकआउट किया। उसके बाद भाजपा ने मेयर सहित 13 पार्षदों के साथ एजेंडा पास कर दिया।