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प्रस्ताव पास: विधानसभा बने और चंडीगढ़ को पूर्ण यूटी का दर्जा मिले, पंजाब-हरियाणा के लिए अलग-अलग राजधानी बनाए केंद्र

Thu, 07 Apr 2022 01:53 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

भाजपा का कहना है कि केंद्रीय सेवा नियम पर भी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ओछी राजनीति कर रहे हैं और झूठ बोल रहे हैं, क्योंकि वर्ष 1990 से पहले चंडीगढ़ में केंद्रीय सेवा नियम लागू थे।
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चंडीगढ़ नगर निगम की विशेष बैठक में हंगामा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच चल रही जंग में अब चंडीगढ़ भी कूद गया है। गुरुवार को विशेष बैठक बुलाकर नगर निगम सदन ने चंडीगढ़ की अपनी विधानसभा बनाने और पूर्ण केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिलाने का प्रस्ताव पास कर दिया। वहीं, केंद्र को इस मामले में दखल देकर हरियाणा और पंजाब के लिए अलग-अलग राजधानी बनाने की बात कही। प्रस्ताव पारित होने पर नगर निगम सदन में केवल भाजपा के पार्षद मौजूद थे। विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया। 

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बता दें कि पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की विधानसभाओं ने हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ पर अपने दावे को दोहराते हुए अपने-अपने प्रस्ताव पारित किए हैं। चंडीगढ़ नगर निगम की महापौर व भाजपा नेता सरबजीत कौर ने निगम की आम सभा की विशेष बैठक बुलाई थी। प्रस्ताव में कहा गया है कि चंडीगढ़ के निवासियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इसे पूर्ण केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया जाना चाहिए। साथ ही चंडीगढ़ में विधानसभा का गठन किया जाना चाहिए ताकि निवासियों को शहर की नीतियों और भविष्य के बारे में खुद निर्णय लेने में सक्षम बनाया जा सके। प्रस्ताव में हरियाणा और पंजाब के लिए अलग-अलग राजधानी बनाने के लिए केंद्र सरकार से दखल देने की मांग की गई। 

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने एजेंडे को लेकर अपनी सहमति तो दे दी लेकिन धर्म संकट के चलते पहले पानी के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए कहा, उसके बाद इस एजेंडे को लाने की बात कही। ऐसा न होने पर दोनों दलों ने वॉकआउट कर दिया। वहीं, शिरोमणि अकाली दल के पार्षद ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब के गांवों को मिलाकर बना था इसलिए इसे पंजाब का हिस्सा बनाना चाहिए। यह कहकर वह भी वॉकआउट कर गए। अंत में मेयर सरबजीत कौर सहित 12 भाजपा पार्षदों ने सहमति जताते हुए प्रस्ताव को पास कर दिया।

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बैठक में आप पार्षद तरुणा मेहता ने कहा कि हमने या हमारी पार्टी ने कभी नहीं कहा कि चंडीगढ़ से यूटी का दर्जा छीन लिया जाए लेकिन चंडीगढ़ के विकास की बात आती है तो सदन में बताया जाता है कि प्रशासन के प्रस्ताव को पलटा नहीं जा सकता है, यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है, फिर यह राजनीतिक एजेंडा, जिसका अधिकार हमारे पास नहीं हैं, उसे क्यों लाया गया है।

कांग्रेस पार्षद गुरुबक्श रावत ने कहा कि इस तरह का प्रस्ताव लाना अच्छा है लेकिन इसमें लोगों से सुझाव मांगे जाते तो और बेहतर होता। आम लोगों के घरों में चोरी हो जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन कोई अधिकारी या नेता आ जाए तो उनकी सुरक्षा में पूरी फोर्स तैनात हो जाती है। वीआईपी लोगों की सुरक्षा के चक्कर में शहर के लोगों का अधिकार मारा जाता है। शहर की सड़कों पर गड्ढे होते हैं तो पंजाब और हरियाणा से फंड नहीं आता। हम शहर के विकास के एजेंडों को लेकर ऐसे ही विशेष बैठक बुलाएंगे तो बेहतर होगा।

एक बार फिर सदन में पोस्टर वार, आप व भाजपा पार्षदों में नोकझोंक
सदन में एक बार फिर आम आदमी पार्टी ने पानी के दामों को लेकर पोस्टर लहराना शुरू किया तो भाजपा पार्षदों ने भी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम लिखे पर्चे दिखाने शुरू कर दिए। इस बीच आप पार्षद दमनप्रीत बादल मेयर की टेबल पर हाथ रखकर कुछ दस्तावेज दिखाने लगे तो भाजपा पार्षद जसमनप्रीत ने उनका हाथ हटाकर पीछे कर दिया, इस बात को लेकर दोनों में काफी नोकझोंक हुई। अन्य पार्षदों ने बीचबचाव कर दोनों को हटाया। 
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सांसद बीमार तो वर्चुअल जुड़तीं, सदन की भावनाओं को कौन संसद में रखेगा: रावत
कांग्रेस पार्षद गुरुबक्श रावत ने कहा कि सांसद किरण खेर बीमार हैं इसलिए सदन में आने में असमर्थ हैं लेकिन वह वर्चुअल तरीके से सदन में जुड़तीं तो शायद पार्षदों की भावनाएं जान पातीं। जनप्रतिनिधियों की बात को लोकसभा तक पहुंचाने का माध्यम सांसद ही हैं। ऐसे में यहां जिन मुद्दों को लेकर चर्चा हुई, उसे लोकसभा में रखना भी जरूरी है।

तीनों जगहों से आ गया प्रस्ताव, संसद करेगी निर्णय: सत्यपाल जैन
पूर्व सांसद सत्यपाल जैन का कहना है कि चंडीगढ़ को लेकर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ तीनों के मत अलग-अलग हैं और तीनों प्रमुख पार्टियों के प्रदेश प्रभारियों के मतों में भी भिन्नता है। इस मुद्दे पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ तीनों ने अपने प्रस्ताव दे दिए हैं। किसी भी राज्य की सीमा में बदलाव देश की संसद का विषय है। इसके लिए संविधान में संशोधन करना होता है। यह दो राज्यों में अंतरराज्यीय विवाद है। इसे आपसी सुलह से हल करना ही बेहतर रास्ता है। एक बार चंडीगढ़ इस विवाद को झेल चुका है, इसलिए दोबारा यह स्थिति नहीं बननी चाहिए।

एक तिहाई पार्षद पास कर सकते हैं एजेंडा: आयुक्त
सदन में पार्षदों की ओर से हंगामा होने के बाद आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा कि सदन में उपस्थित पार्षदों में से एक तिहाई ने समर्थन कर दिया तो एजेंडा पास हो जाएगा। आप और कांग्रेस ने विकास कार्यों पर चर्चा न होने पर वॉकआउट कर दिया, वहीं अकाली दल के पार्षद ने भी बात न सुने जाने पर वॉकआउट किया। उसके बाद भाजपा ने मेयर सहित 13 पार्षदों के साथ एजेंडा पास कर दिया।
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