कोटकपूरा गोलीकांड और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल मंगलवार को नई एसआईटी के सामने पेश हुए। सेक्टर-4 स्थित विधायक आवास पर एसआईटी के सदस्यों ने ढाई घंटे तक उनसे पूछताछ की। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने एसआईटी के 80 से अधिक सवालों के जवाब दिए।
एसआईटी ने पूर्व मुख्यमंत्री को 16 जून को तलब किया था लेकिन उन्होंने खराब स्वास्थ्य के कारण एसआईटी के सामने पेश होने में असमर्थता जाहिर की थी। इसके बाद उनसे मुलाकात के लिए 22 जून का दिन तय हुआ था। तय तारीख के दिन एसआईटी के सदस्य प्रकाश सिंह बादल से पूछताछ के लिए उनके सेक्टर चार स्थित आधिकारिक विधायक आवास पर पहुंचे। इससे पहले नई एसआईटी पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, डीजीपी इकबालप्रीत सहोता और स्पेशल डीजीपी होमगार्ड रोहित चौधरी सिंह से पूछताछ कर चुकी है।
सुखबीर भी हो सकते हैं तलब
इस मामले में अब एसआईटी शिअद के प्रधान सुखबीर बादल से भी पूछताछ कर सकती है। हालांकि शिअद प्रधान ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। उन्होंने इस मामले में कांग्रेस सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व एसआईटी के जरिए आप की लिखी पटकथा पर इससे पहले पूर्व आईजी कुंवर प्रताप राजनीति कर रहे थे।
आप ने की पूर्व मुख्यमंत्री का नार्को टेस्ट कराने की मांग
आम आदमी पार्टी (आप) ने कोटकपूरा गोलीकांड मामले में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का नार्को टेस्ट कराने की मांग की है। विधायक और आप के किसान विंग के प्रधान कुलतार सिंह संधवां ने आरोप लगाया कि कैप्टन सरकार नई जांच समिति द्वारा बादल परिवार को बचाने के लिए नाटक कर रही है, पंजाब निवासियों को कोई इंसाफ नहीं दे रही। पिछले पांच साल से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी और गोलीकांड को लेकर राजनीति की जा रही है।
पूर्व डीजीपी समेत तीन पुलिस अधिकारियों के नार्को टेस्ट पर सुनवाई छह जुलाई तक स्थगित
बरगाड़ी बेअदबी मामले से जुड़े कोटकपूरा गोलीकांड केस में पंजाब पुलिस की नवगठित एसआईटी ने बीते 11 अप्रैल को प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में आवेदन दाखिल कर केस की पड़ताल के लिए राज्य के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, निलंबित आईजी परमराज सिंह उमरानंगल व पूर्व एसएसपी मोगा चरनजीत सिंह शर्मा का नार्को टेस्ट व ब्रैन मेपिंग टेस्ट करवाने की इजाजत मांगी थी।
आवेदन पर अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी करके मंगलवार तक जवाब तलब किया था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों के वकीलों ने अदालत में पेश होकर पक्ष रखने के लिए समय देने का आग्रह किया, जिस पर अदालत ने सुनवाई को 6 जुलाई तक स्थगित कर दिया।