अल्टासाउंड केंद्रों के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने बेहद अहम फरमान जारी किया है। आईएमए का कहना है कि किसी भी अल्ट्रासाउंड केंद्र पर गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड नहीं किया जाएगा।
आईएमए का यह फरमान गर्भवती महिलाओं के लिए आफत बन गया है। इस कारण महिलाओं और परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आलम यह है कि उन्हें मजबूरन अब दूसरे जिलों की ओर रुख करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग भी महिलाओं की इस समस्या का समाधान नहीं कर पा रहा है।
बता दें कि स्वास्थ्य विभाग तथा पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा गत 15 जुलाई को शहर के एक निजी अस्पताल पर छापेमारी कर अस्पताल की महिला चिकित्सक व कंपाउंडर को लिंग जांच के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
इसके बाद आईएमए महिला चिकित्सक व कंपाउंडर के पक्ष में उतर आई थी। आईएमए ने 48 घंटों के लिए पूर्ण रूप से सभी निजी अस्पतालों की हड़ताल की थी। 48 घंटे की हड़ताल समाप्त होने के बाद आईएमए ने यह फैसला लिया था।
स्वास्थ्य विभाग ने नहीं उठाए कदम
जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास अल्ट्रासाउंड की कोई व्यवस्था नहीं है। सामान्य अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था थी, लेकिन पिछले कई दिनों से लेडी चिकित्सक के छुट्टी पर चले जाने के कारण सामान्य अस्पताल में भी गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। लेकिन सेहत विभाग आंखें बंद किए हुए है।
आईएमए के आह्वान पर निजी चिकित्सकों द्वारा गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं करने का फैसला लिया गया है। जींद के अलावा सोनीपत, रोहतक, झज्जर, भिवानी, रेवाड़ी व हिसार जिलों के निजी चिकित्सकों ने भी गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड बंद कर दिए हैं। जब तक स्वास्थ्य विभाग पीएनडीटी एक्ट की आड़ में निजी चिकित्सकों को प्रताड़ित करना बंद नहीं करेगा तब तक वह गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड नहीं करेंगे।
- डॉ. प्रवीण गुप्ता, सचिव, आईएमए, जींद
सामान्य अस्पातल की महिला चिकित्सक 22 जुलाई तक मेडिकल लीव पर हैं। इसके चलते सामान्य अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा के लिए उपायुक्त के नोटिस में मामला लाया गया है। उपायुक्त के आदेश के बाद ही आगामी कदम उठाए जाएंगे।
- डॉ. अनिल बिरला, सिविल सर्जन, सामान्य अस्पताल, जींद