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पिता की मौत के 10 साल बाद भी बेटे को नहीं मिली नौकरी, लंगरों में भरना पड़ रहा पेट, आदेश भी बेअसर

Thu, 08 Nov 2018 02:53 PM IST
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के निर्देशों को अधिकारी तवज्जो नहीं देते। हैरानी की बात है कि सेक्टर-16 के मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के अफसर प्रशासक के निर्देश के बावजूद मृतक आश्रित को संविदा पर रखने को तैयार नहीं हैं। पीड़ित बीते 9 साल से अस्पताल के चक्कर काट रहा है। पिता की मौत के बाद बेटे को शहर में लगने वाले लंगरों से पेट भरना पड़ रहा है।

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मलोया निवासी रजिंदर कुमार के पिता नाहर सिंह सेक्टर-16 के जीएमएसएच में रेगुलर वार्ड सर्वेंट की नौकरी करते थे। 12 दिसंबर 2008 में नाहर की ऑन ड्यूटी मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद बेटे रजिंदर ने परिवार के भरण पोषण के लिए संविदा पर जीएमएसएच में नौकरी के लिए आवेदन किया था। बीते कई साल से उसे अस्पताल प्रबंधन नौकरी देने के नाम पर सिर्फ छलावा ही कर रहा है।

रजिंदर ने थक-हारकर प्रशासक के दरबार में बीते सितंबर माह में गुहार लगाई। प्रशासक ने पीड़ित को संविदा पर रखने के लिए हॉस्पिटल को 23 अक्टूबर को एक पत्र जारी किया। इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन अभी तक कोई ध्यान नहीं दे रहा। प्रशासक का पत्र मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने यह कहकर खारिज कर दिया कि आवेदनकर्ता किसी फर्म में रजिस्टर्ड कर्मी नहीं है। उधर, रजिंदर का कहना है कि वह हॉस्पिटल एडमिन को ओर से प्रोवाइड सर्विस से रजिस्टर्ड है, जिसका रिकार्ड उसने अस्पताल प्रबंधन को उपलब्ध कराया है, फिर भी अस्पताल प्रबंधन रखने को तैयार नहीं है।
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रजिंदर कभी मेरे पास नहीं आया है। मैं स्टॉफ का ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट करता हूं। अगर उसका मामला सही है तो उसे अविलंब नौकरी दी जाएगी। -जी दीवान डायरेक्टर, जीएमएसएच-16 चंडीगढ़

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