चंडीगढ़। रक्तदान अभियान को सफल बनाने के लिए अलग-अलग तरीकों से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन की सफलता के लिए लोग खुद रक्तदान करने के साथ ही अपने जानने वाले लोगों को भी रक्तदान अभियान से जोड़ने की सलाह दे रहे हैं। कुछ लोगों पर रक्तदान का जुनून इस कदर हावी है कि वह अपने खास अवसरों पर रक्तदान कर उसे यादगार बना रहे हैं। वही बेटियां भी रक्तदान के लिए आगे आकर खुद को मजबूत साबित करने में जुटी हुई हैं।
रक्तदान कर अपने सेवानिवृत्ति के पल को बनाया यादगार
पीजीआई के तकनीकी सहायक डॉ. पंकज कौल 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने इस अवसर पर पीजीआई में खुद के लिए विदाई समारोह आयोजित न करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने सेवानिवृत्ति के अवसर को यादगार बनाने के लिए पीजीआई परिसर में पौधरोपण किया और रक्तदान कर दूसरों की जीवन बचाने में अपना योगदान देने का सफल प्रयास किया। डॉ. पंकज का कहना है कि रक्तदान एक ऐसा उपहार है जिसे देखकर किसी की जिंदगी में खुशहाली लाई जा सकती है और उसके दिल में ताउम्र अपनी जगह बनाई जा सकती है। डॉ. पंकज ने पीजीआई में अपने 34 साल के कार्यकाल के दौरान 106 बार रक्तदान किया है। वहीं उन्होंने अपना अंगदान करने के लिए भी पंजीकरण करवाया है।
बेटियां भी रक्तदान में पीछे नहीं
रक्तदान अभियान से जुड़कर 26 साल की उम्र में सात बार रक्तदान कर चुकी गुरु मन्नत कौर एक निजी अस्पताल में नर्स हैं। वे ड्यूटी के दौरान अस्पताल में आने वाले मरीजों के परिजनों को रक्तदान के प्रति जागरूक करती हैं। वही गौरी चंदर कौशल व उनकी बहन मेधा कौशल अपने कॉलेज के साथ ही नाते रिश्तेदारों को भी रक्तदान अभियान से जुड़ने के लिए जागरूक करने में जुटी हुई हैं। गौरी चंदर ने बताया कि वे पीलिया के कारण पिछले 2 सालों में चाह कर भी रक्तदान नहीं कर पाई हैं। लेकिन उनका पूरा प्रयास है कि वह पूरी तरह से जल्दी ठीक हो जाए ताकि रक्तदान कर दूसरों का जीवन बचाने में अपना योगदान दे सकें। वही मेधा कौशल पिछले 4 सालों से लगातार रक्तदान कर रही हैं और उनका कहना है कि खून की कमी और लड़की होना जैसे तमाम भ्रमों को दरकिनार कर बेटियां भी बेटों की तरह रक्तदान कर सकती हैं।
राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के मुख्य उद्देश्य
100 प्रतिशत स्वैच्छिक रक्तदान प्राप्त करना ताकि जरूरतमंद रोगियों को जरूरत के अनुसार रक्त दिया जा सके।
- लोगों में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही उद्देश्य
-किसी भी स्थिति के लिए ब्लड बैंक में पर्याप्त रक्त स्टॉक रहे।
- उन लोगों को धन्यवाद देने के लिए जो नियमित रूप से रक्तदान करते हैं।
- जिन लोगों ने अभी तक रक्तदान नहीं किया है उनको इसके लिए प्रेरित करने के लिए।