हाईकोर्ट के विस्तार की योजना के मार्ग की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं, एसओआई के दावे से इसे एक और झटका लगा है। पहले आईआईटी रुड़की ने हाईकोर्ट परिसर को कैचमेंट का हिस्सा बताया था तो अब सर्वे ऑफ इंडिया ने 2004 के मैप में हाईकोर्ट के आधे हिस्से को कैचमेंट में बता दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह मैप 20 साल पुराना है और एयर सर्वे से तैयार किया गया है। ऐसे में नए सिरे से सर्वे किया जाए। मामले में विवाद न हो इसके लिए पांच सदस्यों वाली समिति का गठन किया गया है, जिसमें हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ का एक नामित सदस्य व पंजाब यूनिवर्सिटी से दो विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी संघ के सचिव विनोद धाटरवाल व अन्य ने याचिका में बताया था कि रोज करीब 10000 वकील, 3300 कर्मचारी, वकीलों के 3000 क्लर्क हरियाणा और पंजाब के एजी कार्यालय के कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों, याचिकाकर्ताओं व अन्य लोगों का बोझ हाईकोर्ट परिसर पर होता है। 10000 कार और हजारों दुपहिया वाहनों के बोझ को हाईकोर्ट का मौजूदा परिसर सहन करने में सक्षम नहीं है।
हाईकोर्ट में लंबित पांच लाख से अधिक याचिकाओं को समायोजित करने के लिए शायद ही कोई जगह है। सुरक्षा और आपातकाल की नजर से देखें तो एक छोटी सी घटना के कारण भगदड़ मच सकती है, जिसके अकल्पनीय नुकसान हो सकते हैं। 2012 में हाईकोर्ट की इमारत का विस्तार हुआ था, लेकिन समय के साथ बोझ बढ़ता जा रहा है और परिसर विस्तार समय की जरूरत हो गया है।
इस मामले में हाईकोर्ट ने आईआईटी रुड़की को इस इमारत के विस्तार की योजना को लेकर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। आईआईटी रुड़की ने कहा था कि यह इमारत सुखना कैचमेंट में आती है और ऐसे में यहां कोई निर्माण नहीं हो सकती है। हाईकोर्ट ने उन्हें फिजिकल सर्वे का आदेश दिया था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सर्वे ऑफ इंडिया एयर सर्वे के आधार पर मैप पेश किया जिसमें हाईकोर्ट का बड़ा हिस्सा कैचमेंट में दिखाया गया है। हाईकोर्ट ने इस पर असंतुष्टि जताते हुए अब इस मामले में पांच सदस्यों की टीम गठित करने का आदेश दिया है।