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खड़े-खड़े पढ़ाओगे तो पांव पकड़ लेगी बीमारी

Sat, 06 Sep 2014 05:15 PM IST
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला
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शिक्षकों की महानता की जितनी तारीफ की जाए, कम है। वे खुद परेशानी झेलते हैं, लेकिन स्टूडेंट्स के जीवन को संवारने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते। तभी तो लंबे समय तक खड़े होकर पढ़ाने वाले शिक्षक सैंबर्ग, वैरीकोस, वैरीकोस एक्जीमा, ग्रेविटेशन एक्जीमा जैसी स्किन डिजीज के शिकार होने लगे हैं।
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नेशनल स्किन हॉस्पिटल में पिछले छह माह में इस तरह के 130 केस पहुंचे हैं। ये सभी शिक्षक हैं। स्किन स्पेशलिस्ट का कहना है कि पहले पुलिस, सेना के जवानों या बस कंडक्टर ही इसके शिकार होते थे, लेकिन अब शिक्षकों में भी ये बीमारियां आम होने लगी हैं।

क्यों होती हैं ये बीमारियां
नसों के जरिए शरीर में खून का प्रवाह जारी रहता है। ज्यादा देर तक खड़े होने से अधिक प्रेशर पड़ने के कारण ब्लड बेसल्स की दीवारों को जो सेल बनाते हैं, उनमें गैप बढ़ जाता है।
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धीरे-धीरे टिप्रीनोजीन मॉलीक्यूल स्किन में लीकआउट होने शुरू कर देते हैं। इससे स्किन को ब्लड के जरिए मिलने वाले ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है। इससे परेशानियां शुरू हो जाती हैं।

लक्षण
सैंबर्ग
पैर में लाल, काले और ब्राउन धब्बा होना
बैरीकोस वेंस
नसें सूज जाती हैं और बाद में दर्द शुरू हो जाता है। सही समय पर इलाज नहीं होने से यह वैरीकोस अल्सर का रूप ले लेता हैं, जिससे पैरों में जख्म बन जाता है।
ग्रेविटेशन एक्जीमा
लाल होना, खारिस होना, पैर पर पपड़ी पड़ना।
प्लेटर फीजर
पांव के निचले सतह पर कट लगते हैं और चीड़े पड़ जाते हैं।

बचाव
- विद्यार्थियों को पढ़ाते समय एक स्थान पर ज्यादा देर तक खड़े न हों।
- हर एक-डेढ़ घंटे बाद कम से कम दस मिनट जरूर बैठें।

ज्यादा देर तक लगातार खड़े होकर पढ़ाने की वजह से सैंबर्ग, वैरीकोस, वैरीकोज एक्जीमा, ग्रेवीटेशन एक्जीमा जैसी स्किन डिजीज होती है। पिछले छह माह में इस तरह के 130 केस सामने आए हैं और सभी शिक्षक हैं।
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- डॉ. विकास शर्मा, स्किन स्पेशलिस्ट, नेशनल स्किन हॉस्पिटल, एमडीसी सेक्टर-5
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