चंडीगढ़। सीबीआई अदालत ने 321 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छह लोगों की अंतरिम जमानत को मंजूरी दे दी है। अदालत ने यह मंजूरी एक-एक लाख रुपये की गारंटी पर दी है। इनमें राकेश कंवर, चोकलिंगम नटराजन, अनिल कुमार, प्रताप चंद राणा, सतपाल गर्ग और गौरव कृपाल शामिल हैं। जमानत याचिका से पहले दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें दीं। आरोपियों के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को मामले में झूठा फंसाया जा रहा है। उनसे किसी प्रकार की रिकवरी नहीं हुई है। वह जमानत मिलने के बाद सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे। न ही किसी गवाह से संपर्क करने की कोशिश करेंगे। इससे पहले इंडियन ओवरसीज बैंक की चंडीगढ़ स्थित शाखा के तत्कालीन असिस्टेंट बैंक मैनेजर आशु मेहरा की अग्रिम जमानत याचिका को सीबीआई अदालत ने मंजूरी दी थी। दो दिन पहले ही सीबीआई ने मामले में चार्जशीट दायर की है। इसमें ये सभी आरोपी शामिल हैं।
मामले के मुताबिक़ चंडीगढ़ स्थित आईओबी शाखा के फॉरेक्स डिपार्टमेंट में वर्ष 2010 से तैनात आशु मेहरा, नीतेश नेगी और गौरव भाटिया ने मिलकर दिनेश कुमार, अमनप्रीत सिंह सोढी, अमन किरपाल, गौरव किरपाल की कंपनियों को फायदा पहुंचाते हुए पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा और आईओबी को 47.86 मिलियन यूएस डॉलर (करीब 321 करोड़ रुपये) का नुकसान पहुंचाया था। तीनों बैंक मैनेजरों ने कंपनियों और उनके डायरेक्टरों को करोड़ों का फायदा पहुंचाने के लिए बिना सीनियर अधिकारियों की अनुमति के उनके फेवर में लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किए थे। इसके अलावा फेक बिल पर भी पेमेंट करवाई थी। इससे विदेश में मौजूद पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा ने वहां कंपनियों को करोड़ों रुपये की पेमेंट जारी कर दी, लेकिन जब उन शाखाओं ने उन्हें पेमेंट करने के लिए बैंक अधिकारियों को लिखा तो मामले का खुलासा हुआ था, लेकिन इससे पहले उस समय के अनुसार 321 करोड़ रुपये (तब डॉलर की कीमत 67 रुपये थी) की धोखाधड़ी हो चुकी थी।