डेरा सच्चा सौदा के संत गुरमीत राम रहीम 16 जनवरी को रिलीज होने वाली अपनी फिल्म ‘एमएसजी: द मैसेंजर ऑफ गॉड’ और आश्रम में लोगों को नपुंसक बनाने के आरोपों से चर्चा में हैं।
विज्ञापन
आरोपों के पीछे जहां वे ड्रग माफियाओं का हाथ बताते हैं, वहीं फिल्म से होने वाली आय को थैलेसीमिया व एड्स पीड़ितों के इलाज पर खर्च करने की बात कहते हैं।
शनिवार को वह फिल्म प्रमोशन के सिलसिले में लखनऊ पहुंचे। फीनिक्स मॉल में आयोजित प्रेसवार्ता में अमर उजाला के सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। पेश है उनकी बातचीत के अंश :
विज्ञापन
संत रामपाल के मुद्दे पर बोले राम रहीम
संत रामपाल और आप दो ध्रुव माने जाते रहे हैं। बीजेपी के कई मंत्रियों की श्रद्धा आपमें है। कहा जा रहा है कि केंद्र में भाजपा सरकार आते ही आपके इशारों पर रामपाल को जेल करवा दी गई। क्या कहेंगे? व्यंग्य के अंदाज में कहा कि ‘कौन रामपाल... मैं किसी रामपाल को नहीं जानता।’ सरकारें मेरे इशारे पर नहीं चलतीं। दूसरे, आश्रम में किसी के आने पर पाबंदी नहीं लगी है। आम इंसान से लेकर मंत्री तक यहां आते रहते हैं।
इन दिनों आरोपों से घिरे हुए हैं। लोगों को नपुंसक बनाने के मामले में सीबीआई जांच भी चल रही है। क्या कहेंगे? अब तक करीब पांच करोड़ युवाओं से नशा छुड़वा चुका हूं, जिससे ड्रग माफियाओं का नुकसान हो रहा है। 1992 से मुझे लगातार धमकियां मिल रही हैं। मेरठ में तो ड्रग माफिया ने मेरे अश्लील पोस्टर छपवाकर चिपकवा दिए और मुझे ही ड्रग माफिया घोषित कर दिया। ड्रग माफिया और कुछ लोग लगातार मेरे पीछे पड़े हुए हैं। फिलहाल मामला कोर्ट में हैं और मुझे न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। इतना ही नहीं 1948 से आश्रम चल रहा है। हमारे यहां कोबरा भी निकलता है तो उसे मारते नहीं है। जीव हिंसा करने वालों के लिए जगह नहीं है।
संतों के हाइटेक होने पर दी राय
आजकल के बाबा हाईटेक हो गए हैं? क्या कहना चाहेंगे? ऐसा नहीं है। समय के साथ बदलते रहना चाहिए। वर्ष 2006 में युवाओं ने मुझसे कहा कि हम नशा छोड़ देंगे, बस आप हमारी तरह कपड़े पहनने शुरू कर दीजिए। उसके बाद से टीशर्ट, जींस और ऐसे कपड़े पहनने लगा हूं, जिसे खुद ही डिजाइन करता हूं।
अपनी पत्नी व बच्चों को छोड़ दिया। अब आप ब्रह्मचर्य की बात करते हैं। क्या कहना है? मेरी दो बेटियां व एक बेटा है। लम्बा अरसा हो गया घर छोड़कर संन्यास लेकर ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए, लेकिन परिवार छोड़ने और ब्रह्मचर्य का पालन करने का निर्णय पत्नी की सहमति से लिया।
फिल्म मेकिंग करने के मुद्दे पर कहा
फिल्म के बारे में बताइए? अचानक फिल्म मेकिंग में क्यों उतरना पड़ा? 16 जनवरी को फिल्म रिलीज हो रही है। आजकल की फिल्मों से अलग यह ईश्वर के संदेश को लोगों तक पहुंचाएगी। नशा मुक्ति, वेश्यावृत्ति जैसे 15 सामाजिक मुद्दों को उठाया गया है, जिसकी शूटिंग 67 दिन में पूरी हो गई। चूंकि, युवा सत्संग में जाना पसंद नहीं करते। जाते भी हैं तो बेमन। फिल्में युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं, इसलिए फिल्म को चुना। अगली फिल्म एमएसजी टू होगी।
अभिनय के अलावा निर्देशन और फिल्म के सभी गाने आपने खुद गाए हैं। फिल्म कहीं ‘वन मैन शो’ तो नहीं? (मुस्कुराते हुए...) यह सही है कि सारे गाने मैंने ही गाए हैं, लेकिन फिल्म में तीन हीरोइनें भी हैं, जो मेरी बेटियों का किरदार निभा रही हैं। इसे आप वन मैन शो नहीं कह सकते। 13 लाख लोगों ने अभिनय किया है। ‘नेवर एवर’ गाने की शूटिंग में 1.25 लाख लोग तीन दिन तक डटे रहे। करीब 70 हजार सेवादारों ने 30 सेकंड में मोमबत्तियां प्रज्ज्वलित करने का दृश्य किया।
सुना है फिल्म से होने वाली कमाई को दान करेंगे। ऐसा है क्या? फिल्म से जो भी कमाई होगी, उसे थैलेसीमिया व एड्स पीड़ितों के इलाज व अनुसंधान पर खर्च किया जाएगा ताकि असाध्य रोगों को साध्य बनाया जा सके।
युवाओं को फिल्म के जरिये क्या संदेश देना चाहेंगे? ईश्वर की रहमत पाने के लिए युवाओं को नशे, मांस-मदिरा से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा शादी से पहले ब्रह्मचर्य और विवाद के उपरांत संयम बरतना चाहिए।
इससे पहले कभी कोई फिल्म देखी है? जिंदगी में सिर्फ एक बार फिल्म देखी है, वह भी आश्रम के युवाओं के कहने पर। इसके बाद कभी कोई फिल्म नहीं देखी।