पांच सिंह साहिबान के आदेश के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कार्यकारिणी ने लापता पावन स्वरूपों के मामले में वर्तमान मुख्य अधिकारियों, कर्मचारियों, रिटायर मुख्य सचिव हरचरण सिंह के साथ-साथ सीए एसएस कोहली के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की है। वीरवार शाम को वल्ला स्थित मेडिकल कॉलेज में हुई कार्यकारिणी की बैठक में एसजीपीसी के वर्तमान मुख्य सचिव सहित 15 अधिकारियों, कर्मचारियों सहित धर्म प्रचार कमेटी के एक मीत सचिव पर भी कार्रवाई की गई।
एसजीपीसी के वर्तमान मुख्य सचिव और घटना के दौरान सचिव रहे डॉ. रूप सिंह ने बैठक से पहले अपना इस्तीफा अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल को भेज दिया था। एसजीपीसी ने डॉ. रूप सिंह का इस्तीफा स्वीकार कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के आदेश दिए। पिछले एक दशक से अधिक समय तक एसजीपीसी में समानांतर व्यवस्था चलने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट एसएस कोहली की सेवाएं भी तुरंत खत्म कर दी गई हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार सीए को किए गए अब तक के भुगतान में से 75 फीसदी रिकवर करने के लिए कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया गया। लेजर में हुई गड़बड़ी के आरोप में सीए पर कार्रवाई की गई है। सूत्रों के अनुसार, पिछले 10 साल से लेजर का ऑडिट नहीं करवाया गया था। कार्यकारिणी ने तत्कालीन मुख्य सचिव डॉ. हरचरण सिंह पर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में असफल रहने के आरोप लगाए। बै
ठक में कहा गया कि गोल्डन प्रेस में काम करने वाले कर्मचारियों द्वारा पावन स्वरूपों के रिकॉर्ड में हेराफेरी करने की जानकारी मिलने के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस संवेदनशील मामले में हरचरण सिंह के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत के संकेत मिलते हैं। सिखों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था के मुख्य प्रशासक होने के नाते उन्होंने अपनी जिम्मेदारी ठीक ढंग से सही निभाई। इनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया गया।
एसजीपीसी अध्यक्ष लौंगोवाल ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में बताया कि गोल्डन प्रेस के सहायक सुपरवाइजर (रिटायर) कमलजीत सिंह के फंड को जारी करने पर तुरंत रोक लगा दी गई है ताकि इनके विरुद्ध ठोस कार्रवाई की जा सके।